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Haryana

HARYANA सीएम सिटी को ओडीएफ करने के लिए पोर्टेबल व ई-टाॅयलेट की दी थी सुविधा, रखरखाव के अभाव में हुई बेकार

July 18, 2018 06:26 AM

COURSTEY DAINIK BHASKAR JULY 18

फाइव स्टार शहर के 109 पब्लिक वॉशरूम में से 60 पड़े ठप्प

निगम ने सीएम सिटी को ओडीएफ करने के लिए पोर्टेबल व ई-टाॅयलेट की दी थी सुविधा, रखरखाव के अभाव में हुई बेकार

भास्कर न्यूज | करनाल

शहर में नगर निगम की ओर से जनसुविधा के लिए बनाए गए टॉयलेट नकारा साबित हो रहे हैं। शहर के टॉयलेट (वॉशरूम) पर कहीं ताला लटका है तो कहीं सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। किसी टॉयलेट की टोंटी टूटी पड़ी है तो किसी के दरवाजे ही बंद नहीं होते हैं। ई-टाॅयलेट से भी पब्लिक को कोई सुविधा नहीं मिल पा रही है। कंकरीट के दर्जनों टॉयलेट आधे अधूरी व्यवस्थाओं के साथ बने हैं, जिनका आमजन को लाभ प्राप्त नहीं हो रहा है। शहर के शौचालयों के प्रबंधन में नगर निगम की व्यवस्था फेल हो रही है। बार-बार के दावों के बीच नगर निगम शौचालयों की सुविधा को जन अनुकूल नहीं बना पाया है। जबकि शहर को ओडीएफ घोषित किया गया है। ऐसे में अगर व्यवस्थाएं नहीं सुधरी तो फिर से शहर ओडीएफ की श्रेणी से बाहर आ सकता है। इसके लिए पूरी तरह से नगर निगम जिम्मेदार होगा। क्योंकि शहर के शौचालयों को संचालित करने का जिम्मा हर तरह से नगर निगम का है। लेकिन शौचालयों के रखरखाव की तरफ नगर निगम का कोई ध्यान नहीं है।
टाॅयलेट बंद रहेंगे तो कैसे आएगी स्वच्छता
नगर निगम की ओर से स्वच्छता के क्षेत्र में अच्छा कार्य किया गया है, लेकिन शहर में बनाए गए टॉयलेट का बंद रहना अपने आप में बड़ी विडंबना है। क्योंकि कोई शहर, देहात का नागरिक या मुसाफिर शहर में आता है तो जरूरत पड़ने पर अगर उसे टॉयलेट पर ताला लटका मिले तो क्या हालात होंगे यह खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता है। इसलिए जो टाॅयलेट हैं वे 24 घंटे ओपन और वेल मेनटेन होने चाहिए। -जसपाल गोल्डी, शहर वासी
शो पीस बने शौचालय, लगा रहे प्रश्नचिन्ह
शहर में बनाए गए शौचालय
शहर में पब्लिक सर्विस के लिए 109 शाैचालय बनाए गए हैं, जिनमें कंकरीट के 46, भवन निर्मित 26, लोहे वाले 4, ई-शौचालय 3, मोबाइल पोर्टेबल 11, सुलभ शौचालय 13, विज्ञापन शौचालय 6 व दो शीरो रूम हैं।
मजबूरी में खुले में शौच कर रहे लोग
शहर के अंदर 109 शौचालय बनाए गए हैं, जिनमें से आधे से अधिक पब्लिक के लिए नकारा साबित हो रहे हैं। जबकि पब्लिक टाॅयलेट को बंद रखना शहर में गंदगी को बढ़ावा देने के बराबर है। क्योंकि जहां भी शौचालय बनाए हैं, वहां पर शौचालय बंद मिलने के कारण लोग मजबूरन खुले में ही शौच कर देते हैं। यह हालात रेलवे रोड पर शहर के सार्वजनिक क्षेत्र में हैं, जहां पर निगम में शिक्षण संस्थान स्थित हैं, लेकिन जनसुविधा का आभाव बना हुआ है।
शहर के अधिकतर शौचालय शो पीस बन कर रह गए हैं। कहीं शौचालय बंद पड़े हैं तो कहीं सफाई का बुरा हाल है। कई शौचालयों में पानी की ही सुविधा नहीं है। सबसे ज्यादा बुरा हाल एडवरटाइजमेंट वाले टॉयलेट्स का हैं। एेसी स्थिति नगर निगम की शौचालयों के रखरखाव की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रही है।
राजकीय महिला कॉलेज के समक्ष बने ई-टाॅयेलट पर लगा ताला।
टॉयलेट को स्वच्छ रखना जरूरी
शहर को ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) घोषित किया गया है। लेकिन अगर शहर को स्वच्छ रखना है तो शहर में बनाए गए सार्वजनिक शौचालयों को स्वच्छ बनाए रखना जरूरी है। शौचालयों पर ताले तो बिलकुल भी नहीं लगने चाहिए। यह ऐसी जरूरत है जो 24 घंटे खुले होने चाहिए। नगर निगम को शहर के शौचालयों को मेनटने रखने के लिए विशेष कार्ययोजना के तहत कार्य करना चाहिए। शौचालयों की सफाई पर खासतौर पर फोकस होना चाहिए। -जीतराम, शहरवासी
रेलवे रोड पर बने ई-टाॅयेलट के पास गंदगी और टाॅयेलट पर लगा ताला।
मंत्री से कराया था उद‌्घाटन, दावे हुए फेल
स्तनपान कराने वाली महिलाओं के मद्देनजर शहर में तीन शीरो रूम बनाए गए हैं। रेलवे रोड वाले शीरो रूम का उद‌्घाटन मंत्री से कराया गया था। एक शीरो रूम पर साढ़े आठ लाख रुपए खर्च किए गए थे, लेकिन एक साल के अंदर ही यह ठप हो गए हैं। सुविधा तब मिले जब यह शीरो रूम खुले रहते हों। हालात ये हैं कि इन शीरो रूप पर ताले लटके हुए हैं। महिलाएं यहां पर सुविधा मिलने की उम्मीद से आती हैं, लेकिन गेट पर ताला लटका देखकर वापस जाने को मजबूर होती हैं।
रेगुलर रिपेयर के लिए बनाई टीम
शौचालयों की व्यवस्था में सुधार के लिए नगर निगम की ओर से टीम बनाई गई है, जो रेगुलर रिपेयर का कार्य करेगी। नाइट स्वीपिंग का जो टेंडर दिया जाएगा, उसमें शौचालयों की सफाई को भी शामिल किया जाएगा। शौचालयों की टोटियों इत्यादि जो भी टूट फूट है, उसे ठीक करने के लिए सामान प्रचेज किया गया है। इसके लिए चोरी से बचाव के लिए शौचालयों को सीसीटीवी की जद में लाने का प्रयास किया जाएगा। -धीरज कुमार, ईओ नगर निगम करनाल

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