Sunday, August 19, 2018
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Haryana

हुड्डा बनाम तंवर में उलझ रही है हरियाणा कांग्रेस

July 14, 2018 06:00 PM

ईश्वर धामु(चंडीगढ़):हरियाणा अब चुनावी रंग में रंगने लगा है। हर पार्टी के नेताओं ने टिकट के लिए अपने प्रयास तेज कर दिए है। इसी कारण दिल्ली में हरियाणा के नेताओं की भीड़ बढऩे लगी है। टिकट चाहने वाले नेता दिल्ली में बैठे अपने राजनैतिक आकाओं की कोठियों के चक्कर लगाने लगे हैं। ऐसे नेता जिनको लगता है कि उनको अपनी वर्तमान पार्टी से टिकट नहीं मिल पायेगी, वें नए राजनैतिक आशियाने की तलाश में लग गए हैं। सत्ता हासिल करने की लालसा में आज एक नम्बर पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा दिखाई दे रहे हैं। अगर हुड्डा की राजनैतिक गतिविधियों को वॉच किया जाए तो स्पष्ट दिखाई देगा कि उनको सत्ता हासिल करने की बहुत ही जल्दी है। परन्तु तभी उनको सामने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर दिखाई दे जाते हैं और फिर वें विचलित हो जाते हैं। उनको विचलित देख कर उनके समर्थक फिर दिल्ली दरबार में जाकर तंवर को हटाने की बात कर आते हैं। लगता है कि भूपेन्द्र सिंह हुड्डा यह चाहते हैं कि चुनाव से पहले पार्टी की प्रदेश की बागडोर उनके हाथ लग जाए, ताकि वें अपनों को टिकट दिला सके। परन्तु अभी किसी भी हालात में ऐसा दिखाई नहीं दे रहा है। कांग्रेस हाईकमान पर दबाव बनाने के लिए उन्होने जनक्रांति रथयात्रा शुरू की। इस रथ यात्रा में पहुंचने वाली भीड़ के फोटो यथा समय पर उनके समर्थकों द्वारा आलाकमान को भेज दिए जाते हैं। मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली बैठे प्रभावी नेताओं के पास तो रथयात्रा से पूर्व होने वाल रैली की वीडियो भेजी जाती है, ताकि आला नेता रैली में पहुंचने वाली भीड़ को देख सके। हुड्डा कैम्प आलाकमान को भीड़ दिखा कर प्रभावित करना चाहता है। परन्तु कांग्रेस के उच्च नेताओं से जुड़े सूत्रों के अनुसार अशोक तंवर गुट राहुल दरबार में यह मैसेज पहुंचाने में कामयाब हो गया बताते हैं कि रथयात्रा की हर रैली में आने वाली भीड़ में वहीं लोग होते हैं। यें भीड़ उन्ही हुड्डा समर्थकों की होती है, जिनको वें अपनी पॉकेट बताते हैं। आलाकमान को बताया गया है कि रैली में स्थानीय लोगों की भीड़ नहीं होती। सूत्र आगे बताते हैं कि कांग्रेस आलाकमान ने यह मान लिया है कि प्रदेेश अध्यक्ष के रूप में अशोक तंवर प्रभावी रहे हैं, वो भी ऐसी स्थिति में जब प्रदेश का पूर्व मुख्यमंत्री और उसके समर्थक विधायकों का गुट उनको सहयोग नहीं कर रहा है। यह भी पता चला है कि हुड्डा के सांसद पुत्र दीपेन्द्र हुड्डा राहुल गांधी के दरबार में अपने पिता की पूरी पैरवी कर रहे हैं। परन्तु अभी तक कोई ठोस परिणाम निकल कर सामने नहीं आया हैं। भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के बारे में नई पार्टी बनाने की चर्चाए भी कभी कभार चल रही है। परन्तु यें चर्चाएं जिस तेजी से चलती है, उसी तेजी से दबी भी जाती है। लेकिन भूमि आबंटन में चल रही जांच से हुड्डा कैम्प अवश्य विचलित है। कई चर्चाकार उनकी रथयात्रा को इस केस से भी जोड़ कर देख रहे हैं। परन्तु प्रशासनिक क्षेत्र से राजनीति में आए सेवा निवृत आईएएस अधिकारी प्रदीप कासनी के रोहतक दौरे से हुड्डा कैम्प को फिर से परेशानी में डाल दिया है। कहा गया है कि कासनी रोहतक वर्तमान सांसद दीपेन्द्र हुड्डा का विकल्प की तलाश में आलकामान के भेज हुए पहुंचे थे। यह भी बताया गया है कि लोकसभा में प्रभावी प्रत्याशियों की इस तरह से आलाकमान ने जानकारी चाही है। पर हुड्डा कैम्प इस बात के कई मायने निकाल रहा है। कासनी अपनी रिपोर्ट 15 जुलाई के बाद कभी भी आलाकमान को सौंप देंगे। अब यें आलाकमान पर है कि वो इस रिपोर्ट के क्या मायने निकालती है?

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