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गे सेक्स क्राइम न रहे तो कलंक, भेदभाव खुद मिट जाएगा: SC

July 13, 2018 05:44 AM

COURSTEY NBT JULY 13

गे सेक्स क्राइम न रहे तो कलंक, भेदभाव खुद मिट जाएगा: SC


भेदभाव से सेहत पर भी असर पड़ रहा: सुप्रीम कोर्ट


बैंड, बाजे का देना होगा हिसाब/
जज के बेटे का हवाला दिया
LGBT समुदाय के लिए सामाजिक कलंक सिर्फ इसलिए कायम हैं क्योंकि सहमति से सेक्स संबंध को अपराध से जोड़ा गया है।

-सुप्रीम कोर्ट• विस, नई दिल्लीः अगर केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट की सलाह मानती है तो जल्दी ही लोगों को शादियों में होने वाले खर्चे-पानी का ब्यौरा देना होगा। अदालत ने केंद्र से कहा कि वह वर और वधू दोनों पक्षों के लिए शादी से जुड़े खर्चों को संबंधित मैरिज ऑफिसर को लिखित में अनिवार्य रूप से बताना अनिवार्य करे। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि इससे दहेज की कुप्रथा पर भी लगाम लगेगी और दहेज कानूनों के तहत दर्ज होने वाले फर्जी मुकदमे भी कम हो जाएंगे।
बहस के दौरान वकील श्याम दीवान ने कहा कि अब समय आ गया है कि कोर्ट अनुच्छेद 21 के तहत राइट टु इंटिमेसी को जीवन जीने का आधिकार घोषित करे। सीनियर ऐडवोकेट अशोक देसाई ने समलैंगिकता को प्राचीन भारतीय संस्कृति का हिस्सा बताते हुए हाई कोर्ट के पूर्व जज की किताब का हवाला दिया, जिसमें जज ने कहा था कि उनका बेटा होमो है और मौजूदा कानून के तहत अपराधी है।• विशेष संवाददाता, नई दिल्ली

 

समलैंगिकता के मुद्दे पर चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि अगर दो बालिगों के बीच सहमति से संबंध को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया जाए तो LGBT समुदाय से जुड़े कई मुद्दे, जैसे कि सामाजिक कलंक और भेदभाव खुद ही खत्म हो जाएगा। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ ने कहा कि अरसे से इस समुदाय के प्रति भेदभाव किया गया, जिसने भारतीय समाज में गहरी जड़ें जमा लीं। सुप्रीम कोर्ट ने IPC की धारा-377 के तहत दो बालिगों के बीच सहमति से संबंध बनाए जाने को अपराध के दायरे से बाहर किए जाने की अर्जी पर सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि भेदभाव से इस समुदाय के लोगों की सेहत पर भी असर पड़ रहा है। संविधान पीठ ने कहा कि सहमति से संबंध को अगर अपराध के दायरे से बाहर कर दिया जाता है, तब भेदभाव हो या कोई अन्य रोकटोक, सब कुछ खुद ही खत्म हो जाएगा। बहस के दौरान जस्टिस इंदू मल्होत्रा ने कहा कि दुनिया में प्रकृति और विकृति, दोनों का साझा वजूद है और सैकड़ों जीव प्रजातियां हैं जो होमोसेक्सुअल हैं। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर अगली सुनवाई 17 जुलाई को करेगा।

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