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शिक्षा क्षेत्र में जिओ संस्थान को उत्कृष्टता का दर्जा

July 12, 2018 02:41 PM
प्रजातंत्र व पूंजीवाद दोनों एक-दूसरे के पूरक माने जाते हैं। राजनैतिक सत्ता का आधार समानता तथा पूंजीवाद आर्थिक प्रणाली में वैयक्तिक सत्ता को महत्व दिया जाता है। लेकिन आज जो हम वैश्विक स्तर पर देख रहे हैं, उसमें दोनों का रूपांतरण हुआ है। क्रोनी कैपिटलिज्म द्वारा जहां प्रजातंत्र को निगलने का प्रयास जारी है, वहीं बढ़ती आर्थिक विषमताएं, आर्थिक एकाधिकार को जन्म दे रही है। इसका ताजा उदाहरण है केन्द्र सरकार द्वारा रिलायंस इण्डस्ट्रीज के ‘जिओ इन्स्टीच्यूट’ को उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा दिये जाने का है। केन्द्र सरकार ने पूरे भारत में शिक्षा के क्षेत्र में केवल 6 संस्थानों को ‘इन्स्टीच्यूट ऑफ एक्सीलैंस’ अर्थात उत्कृष्ट संस्था का दर्जा दिया, जिसमें से केवल तीन सार्वजनिक क्षेत्र की, दो निजी क्षेत्र की तथा एक ग्रीनफील्ड क्षेत्र से यानी आगामी प्रोजैक्ट के आधार पर ‘जिओ इन्स्टीच्यूट’ को दिया गया है। प्रधानमंत्री, जो कि गुजरात से आए हैं तथा जिनके गुजरात के दो बड़े औद्योगिक घराने, अम्बानी व अदानी से जो तार जुड़े हैं, उससे सब वाकिफ हैं। यह एक अध्ययन तथा अनुसंधान का विषय है कि पिछले 10 व 15 वर्षों में इन दो औद्योगिक समूहों में कितना विस्तार हुआ है तथा किसके बल पर हुआ है। लाइसैंस राज में परमिट व लाइसैंस लेकर, निजी क्षेत्र के उद्योगपति आगे बढ़े तो अब भी राजनैतिक सत्ता के वरदहस्त से ये औद्योगिक ग्रुप आगे बढ़ रहे हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि मोदी जी की विदेश नीति में जो चीन से गलबहियां की जा रही है, उसके पीछे भी यही कारण है कि अम्बानी की ‘जिओ क्रांति’ में चीनी कम्पनियों का सामान जैसे चिप इत्यादि जो भी लगी है तथा सस्ते नेटवर्क उपलब्ध कराने में इनका बहुत योगदान है। इसी प्रकार अदानी ग्रुप ने भी बैंक ऑफ चाइना से बड़ी भारी मात्रा में सस्ता ऋण ले रखा है। 800 एकड़ क्षेत्र में बनने वाले अम्बानी के ड्रीम प्रोजैक्ट को केन्द्र सरकार ने अस्तित्व में आने से पहले ही उसे उत्कृष्ट संस्था का दर्जा देकर उनके भावी प्रोजैक्ट में गारंटी देकर उनके जोखिम को बिलकुल कम कर दिया है। कभी हार्वर्ड जैसी शैक्षणिक संस्था का मजाक बनाने वाले मोदी जी, कि हम ‘हार्ड वर्क’ से आए हैं, हार्वर्ड से नहीं, वहीं उन्हीं की सरकार ने पसीना, परिश्रम तथा अनुभव के आधार पर खड़े किए गए उनके संस्थानों में से किसी को पसंद नहीं किया तथा शिक्षा के क्षेत्र में ‘जिओ संस्थान’ के पदार्पण को ही उत्कृष्टता का प्रमाणपत्र दे दिया है। कहा यह जा रहा है कि सरकार इसको कोई वित्तीय सहायता नहीं देगी, लेकिन जो मोटी फीस छात्रों से ली जाएगी या केवल अमीर-अरबपतियों के बच्चे के लिए ही इसके दरवाजे खुलेंगे। उसका अवसर इस प्रोजैक्ट को जन्म के पहले ही दे दिया गया है। मुकेश अम्बानी इसे अपना अहम प्रोजैक्ट बता रहे हैं, लेकिन भारत की जनता के लिए यह कितना अहम होगा तथा उनके इस ड्रीम प्रोजैक्ट से भारत के लोगों के कितने सपने साकार होंगे, यह तो समय ही बताएगा। पर हाल की घड़ी में, सरकार द्वारा इसे उत्कृष्ट संस्था का दर्जा देना, पूंजीपतियों और सरकार की मिलीभगत का उत्कृष्ट उदाहरण है। (डॉ० क० ‘कली’)
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