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संघ को लगता है, अभी जिसे इतिहास कहते हैं वो नीरस है-'काम' मतलब सिर्फ सेक्स नहीं

July 10, 2018 05:29 AM

COURSTEY NBT JULY 10

संघ को लगता है, अभी जिसे इतिहास कहते हैं वो नीरस है


संघ की इतिहास विंग की राय, गलत सीख देने वाली चीज पढ़ने की जरूरत नहीं


Poonam.Pandey@timesgroup.com


•नई दिल्ली : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का इतिहास विंग अब इतिहास की पूरी बहस को ही बदलने की कोशिश में है। संघ के संगठन ‘अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना’ का कहना है कि अब तक जिसे इतिहास कहा जाता है, उसकी वजह से इतिहास नीरस विषय हो गया है जबकि इतिहास धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चार पुरुषार्थों को देने वाला साक्ष्य है। संघ के संगठन का यह भी सुझाव है कि समाज में आई बुराइयां दूर करने के लिए बच्चों को शुरू से ही स्त्रीलिंग-पुल्लिंग बताने की बजाय मातृलिंग-पितृलिंग बताएं और

यही पढ़ाएं।

बीते वक्त का दस्तावेज नहीं : ‘इतिहास संकलन योजना’ इतिहास को परिभाषित करने के लिए एक इंटनेशनल सेमिनार की तैयारी कर रही है जिसमें इस विषय पर चर्चा होगी और फिर इससे जुड़ी किताबें छापी जाएंगी। ‘इतिहास संकलन योजना’ के संगठन मंत्री बालमुकुंद ने एनबीटी से बात करते हुए कहा कि अभी तक बीते वक्त की कहानी और बीते वक्त के दस्तावेज को ही इतिहास कहा जाता था लेकिन हमारा मानना है कि इतिहास अतीत से वर्तमान को जोड़ते हुए भविष्य का निर्माण करता है। संघ प्रचारक ने कहा कि अगर अतीत में किसी ने गलत काम किया है तो उसे वर्तमान में लाने की क्या जरूरत है। जिससे अच्छी सीख मिलती है, सिर्फ वही पढ़ना चाहिए और जिससे गलत सीख मिलती है, उसे पढ़ने की क्या जरूरत। उन्होंने कहा कि इतिहास का एक बड़ा पक्ष सत्य को स्थापित करना है और सत्य ही धर्म है। संघ प्रचारक ने कहा कि हम सेमिनार के जरिए इतिहास को नई परिभाषा देंगे। अभी इतिहास एक नीरस विषय है। हम इसे जीवन के लिए उपयोगी विषय बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इसमें हम धर्म के साथ ही अर्थ, काम और मोक्ष की बात करेंगे। अर्थ सिर्फ धन नहीं, वे सारे संसाधन हैं जो जीवन को सार्थक करता है।

'काम' मतलब सिर्फ सेक्स नहीं : संघ प्रचारक ने कहा कि काम का मतलब सिर्फ सेक्स बना दिया गया है जिससे बच्चों के मन में गलत प्रभाव पढ़ता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को शुरू से पढ़ाया जाता है कि एक स्त्रीलिंग होता है और एक पुल्लिंग लेकिन इसकी जगह उन्हें बताना चाहिए कि एक मातृलिंग होता है और एक पितृलिंग। उन्हें बताया जाए कि यह सम्मानित है, इससे समाज में जो समस्या आ रही है, वह दूर होगी

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