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SC के ऑर्डर को मानने से किया जा रहा इनकार’

July 07, 2018 05:42 AM

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SC के ऑर्डर को मानने से किया जा रहा इनकार’


• विशेष संवाददाता, सिविल लाइंस

 

सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के कुछ ही घंटे बाद दिल्ली सरकार ने अफसरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग की नई व्यवस्था लागू करने के आदेश तो दे दिए। हालांकि एलजी सहमत नहीं हैं कि सर्विसेज डिपार्टमेंट का कंट्रोल दिल्ली सरकार को सौंपा जाना चाहिए। कोर्ट के फैसले पर एलजी से 25 मिनट की मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कोर्ट के फैसले से अब यह साफ हो गया है कि एलजी को दिल्ली कैबिनेट की सलाह को मानना होगा और हर फाइल पर एलजी की मंजूरी की जरूरत नहीं है। सीएम ने कहा कि इस बात की खुशी है कि एलजी इस बात पर सहमत है कि अब फाइलें एलजी के पास मंजूरी के लिए नहीं भेजी जाएंगी। एलजी को कैबिनेट के फैसलों के बारे में जानकारी देनी होगी। सर्विसेज पर दिल्ली सरकार को इग्जेक्यूटिव पावर दिए जाने से एलजी ने इनकार कर दिया है। केजरीवाल ने कहा कि भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने से खुले तौर पर मना कर दिया हो। केजरीवाल के 9 दिन के धरने के बाद उनकी एलजी से यह पहली मुलाकात थी।

सीएम ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में साफ कहा गया है कि पुलिस, जमीन और पब्लिक ऑर्डर को छोड़कर बाकी सारे सब्जेक्ट्स पर दिल्ली सरकार के पास इग्जेक्यूटिव पावर होगी। एलजी को यह बताया गया कि इस हिसाब से सर्विसेज की पावर भी दिल्ली सरकार को है। अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग, नई पोस्ट क्रिएट करना, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना, अफसरों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई जैसे मामले सर्विसेज के दायरे में है और सर्विसेज बहुत ही क्रिटिकल डिपार्टमेंट हैं। पिछले 3 सालों से सर्विसेज के जरिए दिल्ली सरकार को ठप करने की साजिश की जाती रही है। लेकिन एलजी ने यह मानने से साफ इंकार कर दिया है कि सर्विसेज का अधिकार दिल्ली सरकार को दिया जाए। सीएम ने बताया कि एलजी अनिल बैजल ने इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय से सलाह मांगी थी और केंद्र की ओर से एलजी को कहा गया है कि सर्विसेज को दिल्ली सरकार को नहीं दिया जाना चाहिए और सर्विसेज की पावर का इस्तेमाल एलजी ही करेंगे। सीएम ने कहा कि एलजी ने तर्क दिया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय का 2015 का नोटिफिकेशन रद्द नहीं किया गया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तो गृह मंत्रालय का वह नोटिफिकेशन अपने आप ही खारिज हो जाता है।

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