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Haryana

कितना सार्थक हो पायेगा मुख्यमंत्री का कनैक्ट-टू-पीपल अभियान

July 05, 2018 06:17 PM

ईश्वर धामु(चंडीगढ़):भाजपा ने चुनावी जीत के लिए अपने प्रयास शुरू कर दिए हैं। अब तो भाजपा नेताओं ने यह भी मान लिया लगता है कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक उनसे नाराज है? इसीलिए अब सम्पर्क अभियान की कमान मुख्यमंत्री ने खुद सम्भाली है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कार्यकर्ताओं के घर जाकर चाय पर चर्चा कर उनकी नाराजगी दूर करने का कनैक्ट टू पीपल अभियान शुरू किया है। दूसरी ओर पार्टी के प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मंथन बैठकें कर चुनाव में जीत का फार्मुला तैयार करने में लगे है। अगर मान भी लिया जाए कि भाजपा चुनावी जीत का कोई फार्मुला खोज भी लेती है तो वो किस पर कौन लागू करेगा? क्योकि भाजपा के साथ बड़ी समस्या यह है कि उससे उसका कार्यकर्ता नाराज है। जबकि कार्यकर्ता को आश थी कि अब उनका राज आया है तो उनको भी राज में हिस्सेदारी मिलेगी। लेकिन हुआ इस सोच के एकदम विपरित। हिस्सेदारी मिलनी तो दूर का सपना था, उनकी तो अपनों ने भी नहीं सुनी। रोहतक में पदाधिकारियों की हुई एक बैठक में जब वार्ड स्तर पर प्रचार कार्य करने को बड़े पदाधिकारी ने कहा तो एक जिला स्तरीय पदाधिकारी ने कहा कि अब उनकी कौन सुनेगा? क्योकि साढ़े तीन साल में उनकी किसी ने नहीं सुनी। किसी भी कार्यकर्ता या पदाधिकारी का कोई काम नहीं हुआ। इस जिला स्तरीय पदाधिकारी ने यंहा तक कह दिया बताते हैं कि कोई भी नेता भाजपा के लिए वार्ड या मौहल्लों में वोट मांगने जाता है तो उसको गालियां मिलेगी। इस पर तैश में आए बड़े पदाधिकारी ने कहा कि काम की बात छोड़ो, अगर तुम्हारे नाम के आगे लगा भाजपा हटा दिया जाए तो तुमको कौन पूछेगा? भाजपा के बड़े और प्रभावी पदाधिकारी के इस जबाव में हताशा साफ दिखाई दे रही थी। हालात यहां तक पहुंचे हुए हैं कि एक जिला स्तर के पदाधिकारी के रिस्तेदार की बदली नहीं हो पा रही है। यह रिस्तेदार चतुर्थ दर्जे का कर्मचारी है। पदाधिकारी इसकी बदली के लिए पिछले 9 महीनों से प्रयास में लगा हुआ है। उसने मंत्री, विधायक, चेयरमैन, सीएम के ओएसडी और आला पदाधिकारी तक से निवेदन कर लिया। परन्तु अभी भी बदली के कोई आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं। कमोबेशी यही स्थिति हर स्तर पर बनी हुई है। भाजपा के कार्यकर्ताओं और जिले के पदाधिकारियों में सरकार के प्रति भारी नाराजगी है। यंहा तक कि कार्यकर्ता तो अब खुलेआम मुख्यमंत्री की बैठकों में कार्यकर्ताओं के लिए की गई टिप्पणियों को याद कर दोहराते हैं। जब से अधिकांश विधायकों की टिकट कटने की चर्चाएं चली है तो विधायकों का भी पार्टी से मोह भंग होने लगा है। ऐसे विपरित हालातों में पार्टी के पास मुख्यमंत्री को मैदान में उतारने केअलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं था। लेकिन अब सवाल यह भी आता है कि क्या मुख्यमंत्री मनोहर लाल कार्यकर्ताओं की चार साल की नाराजगी चार महीनों में दूर कर पायेंगे? चर्चाकारों का यह भी कहना है कि पार्टी के पदाधिकारी मुख्यमंत्री की चाय सामान्य से उपर वाले कार्यकर्ता या फिर पदाधिकारी के यंहा ही रखेंगे। ऐसे लोग तो पहले से ही पार्टी के साथ है। यंहा सवाल कार्यकर्ता का है। क्योकि किसी भी पार्टी के लिए चुनावी जमीन कार्यकर्ता ही तैयार करता है।

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