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क्या स्विस बैंक भारतीय अमीरों के तथा भारतीय बैंक गरीबों के?

July 02, 2018 03:30 PM
स्विस नैशनल बैंक में भारतीय नागरिकों एवं कम्पनियों का 7000 करोड़ रुपये जमा हैं, जो कि 2017 में पिछले साल के मुकाबले 50 प्रतिशत बढ़ा है। विश्व रैंकिंग में 73वें स्थान पर भारत पहुंच गया है, जबकि पिछले साल 88वें स्थान पर था अर्थात 15 देशों से आगे छलांग लगाई है। हालांकि स्विस बैंक की रिपोर्ट से यह जाहिर नहीं होता कि इसमें कितना काला धन जमा है? प्रश्न यह है कि वर्तमान सरकार यह दावा करती रही कि नोटबंदी तथा आर्थिक कदमों से कालेधन पर नकेल कसी जा रही है। पर तथ्य और यथार्थ कुछ और बयान कर रहे हैं। मौजूदा हालातों में भारतीय बैंकिंग पर बढ़ते एनपीए के काले बादल मंडरा रहे हैं तथा उनकी विश्वसनीयता तथा साख पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। पर तस्वीर बिल्कुल स्पष्ट है कि देश का अमीर तथा धनाढ्य वर्ग ऋण तो भारतीय बैंक से लेता है, एडवांस तथा क्रेडिट तो देशी बैंकों से लोन पर उठाता है। पर जब डिपॉजिट का प्रश्न आता है, तो टैक्स सेफ हैविन स्थानों जैसे कि स्विस बैंक वगैरह में जमा कराता है। दूसरी तरफ गरीब तथा मध्यम वर्ग जो थोड़ी बहुत बचत करता है, वह देश के सरकारी व निजी बैंकों में जमा करता है, जिसको बैंक देश के छोटे व बड़े उद्यमियों को निवेश, लोन तथा एडवांस देकर, व्यापार और उद्योग को न केवल कार्यशील पूंजी, अपितु स्थायी पूंजी भी प्रदान करते हैं। क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात का विश्लेषण जब भी किया गया, तो ज्यादातर स्टडीज में यही सामने आया कि बैंक गांवों, शहरों तथा नगरों से डिपॉजिट्स इकट्ठा कर, बड़े-बड़े शहरों में बड़े-बड़े मॉल्स, होटल्स व बिल्डर्स को फाइनैंस देते हैं। छोटे बिजनेसमैन तथा व्यापारी को आज भी आढ़तियों तथा महाजनों, मनीलैण्डर्स पर निर्भर रहना पड़ता है। दूसरी दु:ख की बात है कि ये बड़े-बड़े बिजनेसमैन बैंकों का पैसा डकार जाते हैं तथा एनपीए अर्थात डूबते ऋणों की समस्या पैदा करते हैं। भारत के निजी क्षेत्र के उद्यमियों ने देश में उद्योग के विस्तार तथा रोजगार सृजन में कितनी भूमिका निभाई है, यह तो आंकड़े ही बताते हैं। पर इन्होंने देश की बैंकिंग व्यवस्था को खोखला करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। विजय माल्या, नीरव मोदी तथा अन्य कुछ ने खुल्लम खुल्ला पब्लिक मनी को लूटा है। पर असंख्य ऐसे भी होंगे, जिन्होंने यहां का पैसा स्विस बैंकों में जमा करवाया होगा। विपक्ष के हमले के बाद सरकार ने बयान जारी किया है कि सारा जमा काला धन नहीं है तथा भरोसा दिलाया है कि काला धन रखने वालों पर सख्ती बरती जाएगी। देश के मौजूदा आर्थिक हालात पर बहुत कुछ कहता है, बढ़ता स्विस बैंक में भारतीय धन। जिसको मौका मिल रहा है, वह बाहर जा रहा है तथा अपने पैसे को भी बाहर सुरक्षित कर रहा है। महंगी विदेशी शिक्षा लेने युवा बाहर जा रहा है, नौकरी भी बाहर विदेश में आकर्षक बनी हुई है। पैसा भी बाहर जमा किया जा रहा है। भारत का इकोसिस्टम ही प्रतिकूल हो गया है। यह गहन मंथन का विषय है कि इसे कैसे अनुकूल बनाया जाए ताकि देश में रोजगार, आय, निवेश व पूंजी को बढ़ाया जा सके। (डॉ० क० ‘कली’)
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