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नारी सुरक्षा और आधुनिक हरियाणा

June 25, 2018 08:05 PM
जितना देश, समाज व व्यक्ति आगे बढ़ रहा है, उतनी ही असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है। नारी सुरक्षा का मुद्दा जहन में सबसे पहले उतरकर आता है। आज चाहें अखबार पढ़ो या टीवी के खबरिया चैनल्स खोलो, रेप व गैंगरेप की खबर तो अवश्य ही मिलेगी। हरियाणा की लड़कियां-बेटियां जहां चारों ओर देश में परचम लहरा रही हैं। चाहे विश्वस्तरीय खेल प्रतियोगिताओं का क्षेत्र हो या शैक्षणिक प्रतियोगिताएं, सब में लड़कियां अव्वल आ रही हैं। वहीं अत्यंत दु:ख तथा चिंता का विषय है कि हरियाणा राज्य देश की ‘रेप कैपिटल’ बन रहा है, जहां 2016 से हर दूसरे दिन रेप व सामूहिक रेप की घटनाएं हो रही हैं। एक तरफ ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा लगाया जा रहा है, दूसरी ओर हरियाणा की बेटियां न सडक़ पर सुरक्षित हैं, न घर में। मनुष्य की आवश्यकताओं के वर्गीकरण में रोटी, कपड़ा और मकान प्राथमिक हैं, इसके बाद सुरक्षा की आवश्यकता सर्वोपरि हो जाती है। हरियाणा, दिल्ली से सटा है, दिल्ली की सडक़ें तो महिलाओं के लिए कभी सुरक्षित थी ही नहीं। अब हरियाणा भी उसी श्रेणी में आ रहा है, जहां किसी की इज्जत भी सुरक्षित नहीं है। यहां, सडक़ों पर खुलेआम बलात्कार, अपहरण, यौन हिंसा जैसी घटनाएं हो रही हैं। पुलिस भी सोती रहती है तथा सरकार भी। आज प्रश्न भविष्य का है। हमारी किशोरियां कैसे निर्भयता एवं सुरक्षा का कवच पहन आगे बढ़े? एक तरफ समाज में खुलापना बढ़ा है, लड़कियां अपनी स्वतंत्रता व वैयक्तिकता के आधार पर बराबरी के लिए संघर्षरत हैं, वहीं पित्रात्मक सत्ता तथा पुरूष प्रधान समाज अपने पुराने विचारों तथा रूढिय़ों से बंधा है। आज भी समाज स्त्री को नंगी तलवार की तरह से देखता है और उसे म्यान में सुरक्षित रखने या काबिज करने को ललायित हैं। विपरीत लिंग अनुपात ने जहां राज्य में दुल्हनों की समस्या उत्पन्न की है, वहीं बढ़ती बेरोजगारी तथा गरीबी ने युवाओं तथा किशोरों को नशे की ओर धकेलकर नैतिक पतन व आपराधिक गतिविधियों की गिरफ्त में ले लिया है। पुलिस, प्रशासन तथा सरकार इस स्थिति के लिए अपनी जिम्मेवारी से मुंह तो नहीं मोड़ सकती, परंतु इसके लिए समाज में बढ़ता नैतिक खोखलापन ज्यादा जिम्मेवार है। एक तरफ खापों व पंचायतों का वर्चस्व कम हुआ है तो सामाजिक ढील व अनुशासनहीनता भी बढ़ी है। ऐसी घिनौनी हरकतों से समाज तथा परिवार का डर होता था, पर वैयक्तिक स्वच्छंदता तथा मनमानी के बढऩे से जहां बड़े-छोटे का लिहाज खत्म हुआ है, वहीं से इस दयनीय स्थिति का बीजारोपण हो जाता है। नारी सुरक्षा आज नारी विमर्श का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। इस संवेदनशील मुद्दे की इस स्थिति को समाज, परिवार व सरकार सबको सम्भालने के लिए आगे आना होगा। सुरक्षा के समुचित प्रबंध तो करने ही होंगे, परिवार तथा समाज को बदलने के लिए तैयार करना होगा। इस मुद्दे से जुड़े सभी अवयवों को चाहे वह नारी स्वयं है या अभिभावक, परिवार व समाज सभी को उठने, जगने-जगाने व सशक्त कदम उठाने की आवश्यकता है। (डॉ० क० ‘कली’)
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