Thursday, February 21, 2019
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Chandigarh

योग फॉर एवरीडे

June 19, 2018 07:22 PM

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के नजदीक आते ही चहुं ओर योग की चर्चा हो रही है। योग शब्द इतना व्यापक शब्द है कि इसे केवल शारीरिक व्यायाम या मानसिक स्तर या भावनात्मक स्तर तक सीमित नहीं रखा जा सकता। कहीं पर ‘योग में प्रयोग’ तो कहीं पर ‘योग में रोजगार व कैरियर के अवसर’, ‘योग शारीरिक नहीं अध्यात्मिक  प्रक्रिया’ ऐसे अनन्त विषयों पर गोष्ठियां तथा वार्तालाप जारी हैं। वैश्विक स्तर पर भी योग विषय को पापुलर बनाने तथा इसे मार्केटिंग दृष्टि से मनाया जा रहा है। पर भारत के योगी तो प्राचीनकाल से ही विश्व प्रसिद्ध रहे हैं तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त रहे हैं। भारत जैसे मानव संसाधन बहुल्य देश में विकास के रास्ते अगर खुलते हैं तो मानवीय पूंजी के विकास के द्वार से ही खुलेंगे। शिक्षा तथा स्वास्थ्य दो ऐसे विषय हैं, जिस पर सारा विकास का दारोमदार टिका है। योग इन दोनों को जोड़ता भी है तथा योग की इन दोनों क्षेत्र में अनन्त सम्भावनाएं छिपी हैं। शारीरिक व मानसिक विकास दोनों को ही योग से साधा जा सकता है, पर योग, जोकि योगा का पर्याय बन चुका है अर्थात केवल शारीरिक क्रियाएं या श्वास सम्बन्धी क्रियाएं तक सीमित न कर, इसे व्यापक अर्थ में समझना चाहिए। गीता के हर अध्याय के नाम में योग शब्द जोड़ा गया है। वहां तो ‘विषाद’ को भी योग से जोड़ ‘विषाद योग’ अर्थात अर्जुन की अन्यमन्सकता, जिसे शैक्सपीयर के ‘हेमलेट की दुविधा या आमजन की, क्या करें क्या न करें’, की मानसिकता को भी योग से जोड़ ऊंची स्थिति पर स्थापित किया गया है। आवश्यकता है कि योग केवल वर्ष में एक दिन 21 जून ‘योग दिवस’ के अलावा प्रतिदिन जीवन में जीवन का आवश्यक अंग बने, तभी इसका भरपूर फायदा उठाया जा सकता है। इसे राजनेताओं तथा धर्मनेताओं की परिधि से निकाल कर सामाजिक तथा सांस्कृतिक उत्थान के लिए प्रयोग करना चाहिए। इस दृष्टि से ‘योग’ खालिस देसी उपकरण के रूप में देखा जाना चाहिए न कि विदेशों से आयतित श्रद्धा के रूप में, क्योंकि भारतीयों के लिए जिस भी चीज पर विदेशी ठप्पा लगता है तो वह मूल्यवान हो जाती है। भारत जैसे युवा देश के लिए, जिसके 65 प्रतिशत लोग 35 वर्ष से कम उम्र के हैं, उस मानवीय शक्ति में उत्साह, उमंग, कुशलता तथा जीवन्ता बढ़ाने के लिए योग बहुत कारगर सिद्घ हो सकता है। क्योंकि प्रसिद्ध कहावत है इस दुनिया में ‘पहला सुख - निरोगी काया, दूसरा सुख धन और माया’ पर योग जीवन का हिस्सा बने तो निरोगी काया, धन और माया सब पाया जा सकता है। आओ सब मिलकर योग करें व सब को करायें, जीवन सबल व सफल बनाएं।

डा० क कली

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