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पीड़िता के नाम से ‘शपथ पत्र’ सार्वजनिक कर सवालों में घिरे दाती महारा

June 14, 2018 06:06 AM

COURSTEY NBT JUNE 14

आसाराम केस के बाद लिखवाने लगे थे ऐसे लेटर : आश्रम
शपथ पत्र में खुली दाती की 'पोल'

 


पीड़िता के नाम से ‘शपथ पत्र’ सार्वजनिक कर सवालों में घिरे दाती महाराज• प्रमुख संवाददाता, फतेहपुर बेरी

 

रेप और कुकर्म जैसे संगीन आरोपों से घिरे दाती महाराज उर्फ मदन लाल राजस्थानी ने अपने बचाव में ऑडियो-विडियो क्लिप के साथ पीड़िता का एक ‘शपथ पत्र’ सार्वजनिक किया है। अब यह शपत्र पत्र भी सवालों के घेरे में है।

पीड़िता के वकील प्रदीप तिवारी का कहना है कि सभी डॉक्युमेंट काफी पहले दाती महाराज ने आश्रम में लड़की से जबरन साइन करवाए थे। एनबीटी को भी यह शपथपत्र दाती महाराज ने वट्सऐप किए थे। इनकी पड़ताल करते हुए कई चौंकाने वाली बातें दिखीं। शपथ पत्र के 11वें पैरे से शपथ पत्र शक के दायरे में आ गया है।

एनबीटी ने शपथ पत्र को गौर से पढ़ा तो ऐसा लगा कि उसे मनमाने तरीके से कुछ जगहों पर पेन से भरा गया है। कुछ स्थानों पर छेड़छाड़ की गई है। दाती महाराज की ओर से भेजा गया 3 पेज का यह शपथ पत्र टाइप किया हुआ है। लेकिन कुछ जगहों पर खाली जगह छोड़ी गई है।

वहां ब्लू पेन से पीड़िता का नाम, पता, खासतौर पर तारीख लिखी गई है। शपत्र पत्र में 11 पॉइंट देते हुए मजमून के शुरुआत में जहां पेन से 2006 लिखकर पीड़िता के हवाले से कबूलनामा दिखाया गया है कि वह स्वेच्छा से दाती महाराज की शरण में आई, वहीं आखिरी 11 वें पैरे में जो लिखा है उससे शपथ पत्र शक के दायरे में आ गया। उसमें टाइप किया हुए मैटर में लिखा है कि.. ‘मैं निजी कारणों से यह कर रही हूं। इसमें किसी भी प्रकार का छल, प्रलोभन, बल, प्रयोग, उत्पीड़न इत्यादि नहीं है। मैं वचन देती हूं कि मैं दाती महाराज की किसी प्रकार की निंदा नही करूंगी। किसी भी प्रकार का उपहास नहीं करूंगी। क्योंकि यहां मैंने ऐसा कुछ भी निंदा या उपहास आदि के लायक नहीं पाया है।

यदि मैं ऐसा कुछ करती हूं तो इसमें मेरा निजी स्वार्थ ही होगा तथा दाती महाराज अथवा संस्थान मेरे ऊपर उचित कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। आज के बाद मैं किसी अनुचित, अमानवीय अथवा गलत आचरणों के लिए स्वयं जिम्मेदार होऊंगी’..। टाइप मैटर में पीड़िता के कथित साइन और अंगूठा निशानी होने का दावा किया गया।

क्या ऐसे शपथ पत्र वहां सभी से भरवाएं जाते रहे हैं/ इसके जवाब में आश्रम की तरफ से तर्क दिया गया है कि पहले तो इस तरह के शपथ पत्र नहीं लिए जाते थे, लेकिन आसाराम प्रकरण के बाद शपथ पत्र लेने लगे।

मामले में पीड़ित परिवार का दावा है कि आरोपी बाबा ने अपनी करतूतों के खुलासे के डर से उन्हीं दिनों में डरा धमकाकर कई पेपर्स पर लड़की से साइन करवाए थे। एक बार जब कुछ पेज पढ़ने की कोशिश की तो आरोपी बाबा ने कई थप्पड़ जड़े।

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