Wednesday, June 20, 2018
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रेलूराम परिवार का हत्यारा दामाद अभी फरार

June 13, 2018 05:12 AM

courstey DAINIK BHASKAR JUNE 13

संजीव को जानते भी नहीं उसके जमानती

रेलूराम परिवार का हत्यारा दामाद अभी फरार

वकील ने जमानती तलाश खुद शिनाख्त की, 15 हजार रु. लिए, जमानतियों को 3500-3500 दिए

भास्कर न्यूज | यमुनानगर

पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया समेत परिवार के 8 लोगों का हत्यारा दामाद संजीव अभी पुलिस गिरफ्त से बाहर है। संजीव को पैरोल के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। संजीव को पैरोल दिलाने में कई तरह की गड़बड़ियां की गईं, जिन्हें किसी ने जांचा भी नहीं। संजीव को जिन्होंने पैरोल दिलाई, वे उसे जानते भी नहीं। वकील ने जमानती जुटाए और खुद शिनाख्त की। वकील से लेकर जमानतियों तक का कहना है कि उन्हें तो ये भी नहीं पता था कि संजीव ने किनकी हत्या की हुई है। उन्हें बताया गया था कि हत्या के केस में संजीव 16-17 साल की सजा काट चुका है। एक साल की सजा बची है। वह पहले 8 बार पैरोल ले चुका है। उसका रिकॉर्ड अच्छा है। इन बातों में वे आ गए और संजीव के जमानत बन गए। संजीव के लिए जमानती तलाशने वाले वकील मोहित ने बताया कि पैरोल दिलाने के लिए 15 हजार रु. फीस तय हुई थी। इसमें से 3500-3500 रुपए दोनों जमानतियों ने लिए। पैरोल के लिए संजीव के जेल में बने दोस्त चगनौली के पूर्व सरपंच के बेटे रिक्की ने भागदौड़ की। रिक्की के पिता बलदेव सिंह ने ही संजीव की मां के अपने घर में किराएदार होने का शपथपत्र दिया।अब रिक्की का भी कहना है कि उससे गलती हो गई। संजीव को एक-एक लाख के मुचलके पर जमानत मिली है। जमानतियों ने इसके लिए अपनी कृषि भूमि दिखाई है। शेष | पेज 7 पर
चगनौली के पूर्व सरपंच ने अपने घर में संजीव की मां के किराएदार होने का शपथपत्र दाखिल किया
परिवार दहशत में, सुरक्षा के लिए 2 गनमैन तैनात
हिसार | संजीव के फरार होने से पूर्व विधायक रेलूराम के परिवार के लोग दहशत में हैं। रेलूराम के भतीजे जितेंद्र ने जान को खतरा बताते हुए पुलिस प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई। डीएसपी लॉ एंड ऑर्डर जितेंद्र सिंह ने परिवार को दो गनमैन मुहैया कराए हैं। -पेज 2 भी पढ़िए
भास्कर न्यूज | यमुनानगर
पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया समेत परिवार के 8 लोगों का हत्यारा दामाद संजीव अभी पुलिस गिरफ्त से बाहर है। संजीव को पैरोल के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। संजीव को पैरोल दिलाने में कई तरह की गड़बड़ियां की गईं, जिन्हें किसी ने जांचा भी नहीं। संजीव को जिन्होंने पैरोल दिलाई, वे उसे जानते भी नहीं। वकील ने जमानती जुटाए और खुद शिनाख्त की। वकील से लेकर जमानतियों तक का कहना है कि उन्हें तो ये भी नहीं पता था कि संजीव ने किनकी हत्या की हुई है। उन्हें बताया गया था कि हत्या के केस में संजीव 16-17 साल की सजा काट चुका है। एक साल की सजा बची है। वह पहले 8 बार पैरोल ले चुका है। उसका रिकॉर्ड अच्छा है। इन बातों में वे आ गए और संजीव के जमानत बन गए। संजीव के लिए जमानती तलाशने वाले वकील मोहित ने बताया कि पैरोल दिलाने के लिए 15 हजार रु. फीस तय हुई थी। इसमें से 3500-3500 रुपए दोनों जमानतियों ने लिए। पैरोल के लिए संजीव के जेल में बने दोस्त चगनौली के पूर्व सरपंच के बेटे रिक्की ने भागदौड़ की। रिक्की के पिता बलदेव सिंह ने ही संजीव की मां के अपने घर में किराएदार होने का शपथपत्र दिया।अब रिक्की का भी कहना है कि उससे गलती हो गई। संजीव को एक-एक लाख के मुचलके पर जमानत मिली है। जमानतियों ने इसके लिए अपनी कृषि भूमि दिखाई है

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