Saturday, August 18, 2018
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National

पर्यावरण संरक्षण और उत्तरदायित्व

June 05, 2018 06:25 PM
5 जून 2018 विश्व पर्यावरण दिवस को हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी बड़े जोर-शोर से मनाया जा रहा है। पर्यावरण को बचाए रखने के लिए बड़ी-बड़ी विश्वस्तरीय गोष्ठियां तथा छोटे स्तर के स्कूलों में भी इस मुद्दे पर तरह-तरह की प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही है। पर पर्यावरण का यह मुद्दा सबसे जुड़ा है, सबके लिए अहम है। पर्यावरण संरक्षण के लिए हम सबको मिलकर प्रयास करने होंगे, तभी हम अपने सुंदर ग्रह पृथ्वी पर जीवन बचा पाएंगे। क्योंकि पर्यावरण बचा रहेगा तो जीवन भी बचेगा, सभ्यता व संस्कृति भी तभी बची रह पाएगी। पूरे विश्व की बढ़ती हुई आबादी, आज हम सात बिलियन लोग इस धरा पर पर्यावरण का प्रयोग करने वाले भी हैं तथा इसे लिए सबसे बड़ा खतरा भी। जितने ज्यादा लोग, उतने ज्यादा संसाधन चाहिए। न केवल बढ़ते हुए लोगों की संख्या, अपितु जीवन की शैली जो पूर्णत: उपभोगवादी तथा सुविधाभोगी बन चुकी है, वह पर्यावरण के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। अति उपभोग यानी खाओ और फैंको की संस्कृति ने प्राकृतिक संसाधनों को खत्म होने के कगार तक लाकर खड़ा कर दिया है। पुरानी कहावत है, सबकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए साधन उपलब्ध हैं, पर लालच तो एक व्यक्ति का भी पूरा नहीं हो सकता। लेकिन बाजार आधारित जीवन शैली, लाभ व लोभ से प्रेरित उपभोक्तावाद को बढ़ावा देकर न केवल जीवन को खोखला कर रही है, अपितु प्रदत जल, थल व वायु, जो कि अनंत तत्व थे, की कमी महसूस हो रही है। न केवल मानव का उपभोग बढ़ा है। मानव की सुविधा भोगी प्रवृत्ति भी पर्यावरण के लिए समस्या बन चुकी है। प्लास्टिक का प्रयोग न करो, क्योंकि प्लास्टिक सुविधाजनक है, सस्ता पड़ता है, सब धड़ल्ले से प्रयोग कर रहे हैं। हम आज की सोच रहे हैं, आने वाले कल की नहीं सोच रहे। बेइंतहा साधनों तथा पदार्थों का प्रयोग तथा उनको वेस्ट करना इसी सुविधाभोगी प्रवृत्ति में आता है। पर्यावरण सबके लिए, सबका तथा सब इसकी संरक्षण के लिए उत्तरदायी नहीं बनेंगे, तब तक इसे सहेजना तथा जीवन जीने योग्य बनाए रखना, अपने आप में एक बहुत बड़ी चुनौती है। जैसे शांति तथा समृद्धि सामूहिक शब्द हैं, वैसे पर्यावरण भी सामूहिक जिम्मेवारी है। जब तक इसके लिए सब अमीर-गरीब, छोटे-बड़े, विकसित राष्ट्र विकासशील राष्ट्र संवेदनशील, सचेत नहीं बनेंगे तथा दूरदृष्टि नहीं रखेंगे, तब तक इस दिशा में ज्यादा सफलता नहीं मिलेगी। पर्यावरण का सम्बन्ध केवल आज से ही नहीं, आने वाले कल के लिए भी इसे बचाए रखना, संरक्षित करने का भी प्रश्न है। हर व्यक्ति अपने वातावरण को शुद्ध व साफ रखें, परिवार मिलकर अपने चहुं ओर फैले वातावरण की जिम्मेवारी लें, समाज आगे आए, देश अपने आर्थिक विकास के मॉडल ऐसे बनाएं, जिससे पर्यावरण स्वच्छ रहे। अंत में विश्व स्तर पर इसके लिए कदम उठाए जाएं, जिम्मेवारी का दायरा संकुचित करने की बजाय विस्तृत किया जाए। यह जितना विस्तृत होगा, पर्यावरण उतना ही स्वच्छ, सुंदर, पवित्र तथा मानव उपयोगी होगा। (डॉ० क० ‘कली’)
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