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Haryana

यमुना की मौत की त्रासदी

May 26, 2018 07:27 AM

COURSTEY DAINIK BHASKAR  MAY 26

यमुना से ही जाता था दिल्ली को पानी, धार मोड़ कर पक्की नहर गुजारी, तभी से सूखने लगी यमुना नदी

भास्कर न्यूज | पानीपत

 

यमुना के सूखने की कहानी 2003 में ही लिखी गई। केंद्र, दिल्ली व हरियाणा सरकार ने यमुना की धार को मोड़ने का निर्णय लिया था, ताकि दिल्ली को पानी नदी से नहीं मूनक नहर से दिया जाए। 2011 से हरियाणा से दिल्ली तक पक्की नहर बनाकर सप्लाई शुरू हुई। इससे पहले दिल्ली को सप्लाई सीधे यमुना से होती थी, तो कम पानी होने पर भी इसका बहाव बना रहता था। नहर बनने के बाद पानी कम हो या ज्यादा दिल्ली को सप्लाई नहर से ही होती है। गर्मी के दिनों में जब पानी कम आ रहा है, ताे भी उसके हिस्से का पूरा पानी नहर से दिया जाताा है। अब यमुना का पानी सूख चुका है। पाठकों ने भास्कर को मैसेज और वाट्सएप भेजकर बताए यमुना की मौत के जिम्मेदार कौन हैं।
साल 2003 में मूनक नहर की योजना ने लिख दी थी यमुना के सूखने की कहानी, अब नहीं संभले तो होगा सरस्वती जैसा हाल
कम बारिश से नहीं मिलता पानी
केयू में जियोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. नरेश कुमार बताते हैं कि यमुना में पानी कम होने से जमीन के नीचे के पानी का ज्यादा प्रयोग हो रहा है। भूजल स्तर नीचे जा रहा है। नदियों में पानी नहीं होने से वनस्पति खत्म हो रही हैं, फसल चक्र खराब हो रहा है। इको चक्र खराब होने से बारिश कम व ग्लेशियर कम बनता है। अगले वर्ष कम पानी नदी को मिलता है।
गर्मी से सूखी नदी : राजीव जैन
सीएम के मीडिया एडवाइजर राजीव जैन ने कहा कि यमुना को लेकर उनकी बात सीएम से हुई है। सीएम ने कहा है कि यमुना के बहाव के लिए जितना पानी जरूरी है, उतना छोड़ रहे हैं। गर्मी ज्यादा होने से पानी बीच में ही सूख जाता है। इसलिए यमुना का बहाव रुक गया है। इसके लिए सरकार जल्द ही कोई योजना बनाकर प्रयास करेगी।
पहले पाॅवर प्लांट का पानी नदी की धारा में आता था नई नहरों से नहीं बचा पानी
अवैध खनन
हथनीकुंड जैसे ही यमुना हरियाणा में एंट्री करती है। उसके आगे यमुनानगर में सक्रिय माफिया ने 40 फीट तक के गड्ढे खोद रखे हैं।
गर्मी में पानी कम दिया जाता है, जो गड्ढों में ही खत्म हो जाता है।
खनन से रेत उठ गया है। यमुना में जो पानी आता है वो नीचे जमीन में चला जाता है।
4 जिलों में 8500 एकड़ में खनन इसके बहाव में बाधा बन रहा है।
मोदी सरकारने नमामि गंगे प्रोजेक्ट में तय किया था कि गंगा में पानी यमुना से आता है, इसलिए पहले यमुना को सुधारा जाए। प्रोजेक्ट कागजों में ही सीमित है। 1993 में पहले यमुना एक्शन प्लान में 680 करोड़ रुपये खर्च हुए। हर बार सार्वजनिक सुविधा के नाम पर पैसा खर्च हुआ, पर पानी लाने के लिए खर्च नहीं हुआ।
राज्य सरकार
यमुना की हालत के लिए प्रदेश सरकार भी जिम्मेदार है। इसे बचाने का कोई प्रयास नहीं किया।
अवैध खनन में सरकार के कुछ विधायकों और मंत्रियों के रिश्तेदार भी शामिल हैं।
पानी के बहाव में सरकार पहले 881 क्यूसेक पानी दिल्ली को देती है, फिर अपनी सिंचाई के लिए प्रयोग करती है और अंत में जो बचता है उसे यमुना में छोड़ती है।
जमीन के नीचे बह रही यमुना
यमुना सेवा समिति के प्रधान किरनपाल का कहना है कि नदी ताजेवाला के बाद मैदान में प्रवेश करती है। लेकिन यहां पर नदी के साथ सरकार के संरक्षण में सबसे बड़ा खिलवाड़ हो रहा है। स्क्रीनिंग प्लांट व स्टोन क्रशर के बोरिंग गहराई से पानी खींच रहे हैं। इससे नदी का चौवा सूख रहा है। नदी नीचे बह रही है, लेकिन ऊपर सतह पर पानी नहीं है। पहाड़ी क्षेत्र में व नदी के आसपास पुराने लंबी आयु वाले पेड़ लगातार काटे जा रहे हैं।
सफेदा पापुलर की फसल लगाई जा रही है, जो काफी गहराई से पानी खींच रहे हैं। हरियाणा में लगातार चल रहे खनन से नदी में रेत की मात्रा लगभग समाप्त हो गई है। इससे नदी पानी नहीं पी पा रही (पानी की संग्रहण क्षमता समाप्त हो गई है)। पत्थरों से पानी नहीं रुकता सारा बह जाता है। इसलिए लंबे समय तक धारा नहीं बह पा रही है। नदी के सोखने की क्षमता नहीं बची है। पहले पाॅवर प्लांट का पानी वापस नदी की धारा में आता था, लेकिन अब नई-नई नहरें निकाली जा रहीं हैं। इससे भी नदी में पानी नहीं

 
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