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टॉस' को क्रिकेट से उछाल फेंकने की जरूरत है क्या

May 18, 2018 05:26 AM

COURSTEY NBT MAY 18

टॉस' को क्रिकेट से उछाल फेंकने की जरूरत है क्या/


1877 से चली आ रही इस परंपरा को खत्म करने के सवाल पर आईसीसी की कमिटी करेगी चर्चा
पहले नकारा गया था प्रपोजल
2016 की काउंटी चैंपियनशिप में टॉस नहीं किया गया और यहां तक कि भारत में भी घरेलू स्तर पर इसे हटाने का प्रस्ताव आया था, लेकिन उसे नकार दिया गया था। इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) ने दावा किया कि इस कदम के बाद मैच लंबे चले और बैट-बॉल के बीच ज्यादा कड़ा मुकाबला देखने को मिला। आईसीसी क्रिकेट कमिटी में पूर्व भारतीय कप्तान और कोच अनिल कुंबले, एंड्रयू स्ट्रॉस, माहेला जयवर्धने, राहुल द्रविड़, टिम मे, न्यूजीलैंड क्रिकेट के मुख्य कार्यकारी डेविड वाइट, अंपायर रिचर्ड केटलबोरोग, आईसीसी मैच रेफरी प्रमुख रंजन मदुगले, शॉन पोलाक और क्लेरी कोनोर शामिल हैं। टॉस की प्रथा के आलोचकों में शामिल वेस्टइंडीज के महान क्रिकेटर माइकल होल्डिंग और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव वॉ का मानना है कि टॉस से मेजबान टीम को अपनी पसंद का पिच तैयार करने और मेहमान टीम को नुकसान की स्थिति में लाने का मौका मिलता है।

•पीटीआई, नई दिल्ली

क्या इंटरनैशनल क्रिकेट को टॉस को अलविदा कह देना चाहिए, ताकि दोनों टीमों में से कोई फायदे में नहीं रहे/ टॉस का क्रिकेट से शुरू से नाता रहा है, लेकिन इंटरनैशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) की क्रिकेट कमिटी की मुंबई में 28 और 29 मई को होने वाली बैठक में इसकी प्रासंगिकता और निष्पक्षता पर चर्चा की जाएगी। एक वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक, टेस्ट क्रिकेट से मूल रूप से जुड़े टॉस को खत्म किया जा सकता है। आईसीसी क्रिकेट कमिटी इस पर चर्चा करने के लिए तैयार है कि क्या मैच से पहले सिक्का उछालने की परंपरा खत्म की जाए जिससे कि टेस्ट चैंपियनशिप में घरेलू मैदानों से मिलने वाले फायदे को कम किया जा सके।

पहले टेस्ट से ही शुरू हुआ था यह ट्रेडिशन

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सिक्का उछालने यानी कि टॉस की परंपरा इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच 1877 में खेले गए पहले टेस्ट मैच से ही चली आ रही है। इससे यह तय किया जाता है कि कौन सी टीम पहले बल्लेबाजी या गेंदबाजी करेगी। सिक्का घरेलू टीम का कप्तान उछालता है और मेहमान टीम का कप्तान ‘हेड या टेल’ बोलता है। लेकिन हाल में इस परंपरा पर सवाल उठाए जाने लगे हैं। आलोचकों का कहना है कि इसके कारण मेजबान टीमों को अनुचित फायदा मिलता है।

रिपोर्ट में पैनल के सदस्यों को भेजे गए लेटर को कोट करते हुए लिखा गया है, 'टेस्ट पिचों की तैयारियों में घरेलू टीमों के हस्तक्षेप के मौजूदा स्तर को लेकर गंभीर चिंता है। कमिटी के एक से अधिक सदस्यों का मानना है कि हरेक मैच में मेहमान टीम को टॉस पर फैसला करने का अधिकार दिया जाना चाहिए। हालांकि कमिटी में कुछ अन्य सदस्य भी हैं, जिन्होंने अपने विचार व्यक्त नहीं किए

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