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HARYANA-व्यापारियों ने ई-वे बिल जनरेट करने से बचने के लिए निकाला रेहड़ी-रिक्शा का तोड़

May 14, 2018 04:41 AM

COURSTEY DAINIK BHASKAR MAY व्यापारियों ने ई-वे बिल जनरेट करने से बचने के लिए निकाला रेहड़ी-रिक्शा का तोड़

राजेश खोखर | पानीपत

हरियाणा में इंट्रा स्टेट ई-वे बिल लागू हुए करीब महीना होने वाला है। इसे लागू करने का उद्देश्य 50 हजार से ज्यादा सामान के लेन-देन पर ई-वे बिल जनरेट कराना था, ताकि पता चल सके कि कौन व्यापारी किससे कितने का सामान खरीद कर बेच रहा है। व्यापारियों ने इसका भी तोड़ निकाला है। वे बड़े माल की भी टुकड़ों में बिलिंग कर रहे हैं। अगर दिल्ली से पानीपत के लिए कारोबारी 3 लाख कीमत का परचून का सामान लेता है। वह इस कीमत का परचून एक साथ लाता है, तो ई-वे बिल जनरेट करना पड़ेगा। कारोबारी 7 से 8 अलग-अलग ट्रांसपोर्ट पर अपना माल बुक करवाकर ई-वे बिल से बचने का तोड़ निकालता है।
हर जिले में विभाग जांच कर लगा चुका50 लाख से एक करोड़ रुपए तक का जुर्माना
ऐसे मामलों में क्या कार्रवाई तय नहीं
ज्यादातर व्यापारी जिले के अंदर बेचे जाने वाले 50 हजार से ज्यादा के सामान को रिक्शा या रेहड़ियों के जरिए भेज रहे हैं। जिनका कोई ई-वे बिल जनरेट नहीं होता। राज्य कर विभाग अभी यह तय नहीं कर पा रहा है कि इस तरह के मामलों में कैसे कार्रवाई करें। विशेषज्ञ कहते हैं कि इस सीमा के चलते ई-वे बिल व्यवस्था के अच्छे नतीजे प्रभावित हो रहे हैंै। इसको लेकर विभाग के अधिकारी भी परेशान हैं, लेकिन चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं।
पानीपत में अक्सर ऐसे ही रेहड़ी और रिक्शा से माल की सप्लाई होती है।
तथ्य जुटाने में लगा है विभाग
रिक्शा-रेहड़ियों पर 50 हजार से ज्यादा का सामान मिल रहा है। इस पर ई-वे लागू नहीं है। उन्हीं इनवाइस पर बिल की जरूरत है, जिसका टैक्स समेत मूल्य 50 हजार या ज्यादा हो। इसलिए विभाग कार्रवाई नहीं कर पाता। विभाग अभी तथ्य जुटा रहा है और अगली बैठक में इस पर चर्चा होगी।
जहां ट्रांसपोर्ट से भेज रहे सामान, वहां पर नहीं मिल रहा फार्म-बी
क्या है व्यवस्था
ई-वे बिल कानून के तहत अगर एक ट्रांसपोर्टर अलग-अलग व्यापारियों का माल एक साथ लाता है और उसकी संयुक्त लागत 50 हजार से ज्यादा की होती है तो पहले इसके लिए ट्रांसपोर्टस को खुद ई वे-बिल जनरेट करना था। फरवरी में ई-वे बिल लागू होने के बाद ज्यादातर ट्रांसपोर्ट्स यह बिल जनरेट नहीं कर सके। नतीजतन यह व्यवस्था क्रेश हो गई थी। इसलिए इस बार सरकार ने 50 हजार रुपए तक का माल भेजने वाले व्यापारी के लिए ई वे-बिल की अनिवार्यता नहीं रखी।
हर जिले में लगातार जांच जारी
ई-वे बिल को लेकर काफी सख्ती चल रही है, इसको लेकर हर जिले में लगातार अधिकारी जांच करते हैं। बिल के दो पार्ट हैं, फॉर्म-ए व्यापारियों को और फॉर्म-बी ट्रांसपोर्टर को भरना है। फॉर्म-बी में वह वाहन क्रमांक और कन्साइनमेंट की जानकारी होती है। जांच में आया कि व्यापारी अपना पार्ट भरते हैं ट्रांसपोर्टर नहीं। माल पकड़े जाने पर व्यापारियों को परेशान होना पड़ता है। कई जिलों में जांच करके 50 लाख से एक करोड़ तक की पेनल्टी लगाई जा चुकी है।
कितनी अवधि के लिए वैलिड होता है यह बिल
यह बिल बनने के बाद कितने दिनों के लिए वैलिड होता है, यह भी तय है। अगर किसी वस्तु का मूवमेंट 100 किमी तक होता है तो यह बिल सिर्फ एक दिन के लिए वैध होता है। अगर इसका मूवमेंट 100 से 300 किमी के बीच होता है तो बिल 3 दिन, 300 से 500 किमी के लिए 5 दिन, 500 से 1000 किमी के लिए 10 दिन और 1000 से ज्यादा किमी के मूवमेंट पर 15 दिन के लिए मान्य होगा। उप आबकारी व कराधान आयुक्त वीके बेनीवाल कहते हंै कि कुछ लूज पॉइंट हैं, जिनका व्यापारी व ट्रांसपोर्टर फायदा उठा रहे हैं। इसके तथ्य जुटा रहे हैं। उम्मीद है कि इसको लेकर जल्द ही सरकार कुछ निर्णय लेगी और सख्ती होगी।

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