Tuesday, October 16, 2018
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Haryana

HARYANA-आरटीओ हटाए, एडीसी के पास समय नहीं, पुलिस कर रही अनदेखी, विशेष नाके फेल

May 11, 2018 05:31 AM

COURSTEY DAINIK BHASKAR MAY 11

बेलगाम ओवरलोडिंग

अफसरों के सुझाव में फंसी व्यवस्था

कार्रवाई का ऐसा खेल
आरटीओ हटाए, एडीसी के पास समय नहीं, पुलिस कर रही अनदेखी, विशेष नाके फेल

भास्कर न्यूज | पानीपत

ओवरलोड वाहन राज्य को चौतरफा चोट पहुंचा रहे हैं। हादसे, मौत और हत्याओं से लोग डरे हुए हैं, पर सरकार बेबस है। चाह कर भी नकेल नहीं कस पा रही है। शीर्ष अफसरों ने नौ माह में व्यवस्था बदल कर कार्रवाई के लिए नए-नए चार तरीके सुझाए। सरकार ने आंख बंद कर सब पर अमल भी किया। लेकिन एक-एक कर सारी काेशिशें फेल हुईं तो ओवरलोड गाड़ियां और बेखौफ हो गईं। ये दिन-रात सड़कों पर बेरोक-टोक सरपट दौड़ने लगीं। हादसे के आकड़े बढ़ गए। सड़कें टूट गईं। उपयुक्त कार्रवाई न होने की वजह से महज तीन महीने में 12 करोड़ रुपए रेवन्यू कम हुआ। थाने, चौकी, नाके और अफसर नाकाम हुए तो थक-हार कर सरकार को खुद सड़क पर उतरना पड़ा। गुरुवार की देर शाम परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार 2 मंत्री ने नाकों पर स्थिति का जायजा लिया। तीन माह में परिवहन मंत्री 20 से अधिक और एक माह में 10 बार सड़क पर उतर कार्रवाई कर चुके हैं। 450 से अधिक वाहनों पर कार्रवाई में दो करोड़ रुपए जुर्माना वसूला गया।
चौतरफा चोट
आरटीए को हटाया: ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी पुलिस व आरटीए को थी। पर भ्रष्टाचार की शिकायतों की वजह से अगस्त 2017 में विभिन्न आरटीए कार्यालयों पर सीएम फ्लाइंग की छापेमारी हुई और सभी आरटीए हटा दिए गए।
असर: एडीसी को चार्ज दिया। वर्कलोड की वजह से वे ध्यान नहीं दे पाए।
ओवरलोडिंग बढ़ी, राजस्व घटा तो बढ़ गई परेशानी
26 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ 2017 के पहले क्वार्टर में सरकार को।
नाके भी नहीं हुए सफल: नाकों पर जिन अफसरों की ड्यूटी लग रही थी, उन्हें इस काम और चोर रास्तों का ज्ञान ही नहीं था। इसलिए ओवरलोडिंग की दिक्कत और बढ़ने लगी। कई जगह तो जांच में सामने आया कि ड्यूटी इंचार्ज केबिनों में सोते थे।
असर: कर्मचारी पैसे लेकर ओवरलोड वाहनों को छोड़ने लगे।
नौ माह में कार्रवाई के 4 तरीके बदले,3 माह में12 करोड़ का नुकसान, मंत्री ने हाईवे पर उतरकर 450 से अधिक वाहनों पर की कार्रवाई, दो करोड़ जुर्माना वसूला
सड़क पर बेबस सरकार
व्यवस्था में बदलाव और खामियों के बारे में वह सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं
पुलिस की अनदेखी: दिसंबर 2017 में नई योजना के तहत सभी सीमाओं पर विशेष नाके लगाए गए। पुलिस से चालान की जिम्मेदारी वापस ले ली और नाकों पर ड्यूटी मैजिस्ट्रेट को जिम्मेदारी दी गई। सरकार ने पुलिस को अनदेखी की तो पुलिस ने ओवरलोड वाहनों को अनदेखी शुरू कर दी।
असर: पास से ओवरलोड वाहन गुजरते रहे, पर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की।
14 करोड़ रुपए ही मिले 2018 के पहले क्वार्टर में। यानी 12 करोड़ रुपए कम।
दोबारा एडीसी को चार्ज : सरकार को समझ में आया कि नाके कारगर नहीं हैं। इसलिए अप्रैल 2018 में विशेष नाकों को हटाने का निर्णय हुआ। फिर से एडीसी को जिम्मेदारी दी गई। लेकिन एडीसी के पास प्रशासनिक काम इतने हैं कि वो पासिंग के काम पर निगरानी नहीं रख पा रहे।
असर: मौजूदा फैसला भी फेल साबित हो रहा है और मंत्री सड़क पर हैं।
ओवरलोडिंग पर भी लगाम नहीं लगी। मजबूरन मंत्री खुद सड़क पर उतरे।
अफसरों को दिखा रहा हूं आईना, मुख्यमंत्री से करूंगा बात
जयपुर हाईवे से 3 घंटे में औसतन 500 ओवरलोड वाहन गुजरते हैं। 5 मिनट में मैंने 16 वाहनों का चालान कराया था। एक बार पानीपत के पास 10 मिनट में 30, करनाल के पास 8 मिनट में 45 और रेवाड़ी में 10 मिनट में 50 ओवरलोड वहन मिले थे। हकीकत ये है कि अधिकारी काम नहीं करना चाहते। उन्हें सड़क पर उतरकर आइना दिखाना चाह रहा हूं कि वो कार्रवाई नहीं करेंगे तो मैं खुद सक्षम हूं। मैं जिस भी हाईवे से गुजरता हूं तो ओवरलोड वाहन दिखाई देते हैं, लेकिन अधिकारी जानबूझ कर भी अनदेखी कर रहे हैं। यह काम आरटीए का होता है, लेकिन हमारे यहां एडीसी को चार्ज है। उनके पास काम ज्यादा है। नाके भी सफल नहीं हुए। इसलिए जैसे ही सीएम विदेश से लौट कर आएंगे तो सभी तथ्य उनके सामने रखूंगा और इस पर कोई सख्त पॉलिसी लाई जाएगी। -कृष्ण लाल पंवार, परिवहन मंत्री
नाके की दो कहानियां
विशेष नाके पर हरियाणा पुलिस के एक जवान की ड्यूटी थी। लेकिन जब जांच अधिकारी पहुंचा तो पुलिसकर्मी नदारद था। बाद में पता चला कि वह यूपी के शामली पहुंच गया था। जिसमें बड़ी लापरवाही सामने आई थी।
हाल ही में परिवहन मंत्री करनाल में जांच करने पहुंचे तो इंचार्ज देवेंद्र अंदर चारपाई पर सो रहे थे और बाहर कर्मचारी पैसे लेकर ओवरलोड ट्रकों को निकाल रहा था।
4 माह में 4 बड़े हादसे
मई. दादरी में डंपर ने स्कूल बस को मारी टक्कर, तीन बच्चों समेत पांच की मौत।
अप्रैल. दादरी में डंपर दीवार को तोड़ते हुए घर में घुसा।
मार्च. दिल्ली-जयपुर हाईवे पर एएसआई और कांस्टेबल की कार को मारी टक्कर।
फरवरी. करनाल के पास ओवरलोड ट्रक के साथ कार की टक्कर में दो की मौत।
भरोसा करे सरकार
एक एडीसी ने बताया कि ओवरलोड वाहनों के लिए समय नहीं है। विभिन्न विभागों के अधिकारियों का कहना है कि स्टाफ की कमी है, फिर भी बेवजह कर्मचारियों की ड्यूटी नाकों पर होती थी। दिनभर काम के बाद रात में नींद आती थी। हमारे पास नाकों पर ड्यूटी का कोई अनुभव ही नहीं था। आरटीए रह चुके के एक एचसीएस अधिकारी ने कहा कि सरकार को उन पर भरोसा करना चाहिए था।
ठोस नीति-नीयत जरूरी
पूर्व आईजी रणवीर शर्मा ने बताया कि नीति और नीयत का सही होना जरूरी है। सरकार ग्राउंड रियलिटी समझ कर एक स्थाई नीति बनाए। उसे बार-बार बदलने की जरूरत नहीं है। सरकार को चाहिए कि अपने अधिकारियों पर भरोसा दिखाए और उनकी जिम्मेदारी तय करे।
अोवरलोडिंग मजबूरी है
ट्रांसपोर्ट मालिक प्रमोद कुमार ने बताया कि जीएसटी और ई-वे बिल ने खेल बिगाड़ दिया है। गाड़ियां ज्यादा पावर व क्षमता की हैं। लोड क्षमता सरकार ने पुराने समय की तय कर रखी है। तेल केे रेट बढ़ रहे हैं। कम लोड के ट्रक से खर्च भी पूरा नहीं होता।

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