Wednesday, June 20, 2018
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Punjab

PUNJAB-इनकम टैक्स जेब से भरने के लिए 99 विधायकों में से एक को छोड़ किसी ने भी अब तक सहमति नहीं दी

May 10, 2018 05:53 AM

COURSTEY DAINIK BHASKAR MAY 10

सीएम कैप्टन की अपील का 3 महीने बाद भी असर नहीं
सीएम कैप्टन की अपील का 3 महीने बाद भी असर नहीं

अनदेखी

 

अरविंद श्रीवास्तव/राणा रणधीर | पटियाला
खाली खजाने को देखते हुए तीन महीने पहले सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विधायकों से अपील की थी कि वो अपना इनकम टैक्स खुद भरें। लेकिन तीन महीने बीत गए हैं, एक को छोड़कर किसी भी विधायक ने इसको तवज्जो नहीं दी। कुल 117 विधायकों में से कांग्रेस के 77, आप के 22, शिअद के 15, भाजपा के 3 िवधायक हैं। 18 मंत्रियों को हटा दें तो 99 विधायकों में से सिर्फ फतेहगढ़ साहिब के एमएलए कुलजीत नागरा ने ही लिखित रूप से सहमति दी है। पटियाला के 4 विधायकों ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया। विरोधी पार्टी के विधायक भी अजीबो-गरीब तर्क देते हुए पीछे हट गए। दयनीय हालत के कारण सरकार मुलाजिमों को समय पर वेतन तक नहीं दे पा रही, फिर भी करोड़पति विधायकों को अपना ही साढ़े Rs.7 हजार महीने भरना भारी लगता है। इस जानकारी का खुलासा पंजाब विधानसभा में डाली गई आरटीआई से हुआ है।
सिर्फ फतेहगढ़ साहिब से विधायक कुलजीत नागरा ने ही दी लिखित सहमति, कई को अध्यादेश का इंतजार
विधायकों का पौने 11 करोड़ इनकम टैक्स भरती है सरकार
असल में सूबे की बेहद खराब हो चुकी अार्थिक स्थिति को देखते हुए सीएम कैप्टन ने 6 फरवरी को सभी विधायकों से उनकी सैलेरी पर लगने वाले इनकम टैक्स को अपनी जेब से भरने की अपील जारी की थी।
सीएम का मानना है कि अगर सभी अपनी जेब से भरें तो हर साल करीब 11 करोड़ बचेगा
117 विधायकों में से 95 करोड़पति, फिर भी टैक्स भर रही सरकार
चुनाव के वक्त भरे जाने वाले नामांकन पत्रों में दी गई प्रॉपर्टी के ब्यौरों के मुताबिक पंजाब के 95 विधायक करोड़पति हैं। इसके बावजूद अब तक सैलेरी पर सरकार ही इनका टैक्स भरती रही। शिअद-भाजपा के सभी 18 (अजीत सिंह कोहाड़ का निधन हो गया है। उनको मिलाकर), कांग्रेस के 67, आप व लोक इंसाफ पार्टी के 10 विधायक करोड़पति हैं।
इनकम टैक्स जेब से भरने के लिए 99 विधायकों में से एक को छोड़ किसी ने भी अब तक सहमति नहीं दी
11.8 करोड़ रु. हर साल अपने मंत्रियों व विधायकों इनकम टैक्स का भरती है सरकार
7500 रुपए के करीब इनकम टैक्स हर महीने प्रति एमएलए सरकार भरती है।
10.72 करोड़ रुपए सिर्फ विधायकों का इनकम टैक्स बनता है।
वेतन और भत्ते...
-विधायक की मंथली सैलेरी-भत्ते: 84 हजार रु
-पेट्रोल व डीजल: 90 हजार प्रति महीना
-विधानसभा की कमेटियों में आने के 1500 रुपये प्रति सिटिंग
-मंत्री की तनख्वाह आैर भत्ते:
1 लाख 25 हजार रुपए।
इनके लिए पेट्रोल-डीजल की लिमिट तय नहीं है।
2004 में भी आया था इस तरह का प्रस्ताव
14 साल पहले 3 मार्च 2004 को विधायकों का इनकम टैक्स अदा करने का बिल भी कैप्टन अमरिंदर सिंह की उस समय की सरकार में ही आया था, जिसे एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने यह याचिका रद्द कर दी थी, क्योंकि सरकार ने यह दावा पेश किया कि विधायकों का इनकम टैक्स अदा करने से सरकार को कोई नुकसान नहीं होगा। अब सरकार अपने उसी फैसले के उल्ट विधायकों से अपना अपना इनकम टैक्स खुद भरने की अपील कर रही है।
अब जवाब सुनें...पक्ष-विपक्ष विधायकों के
टैक्स खुद भरने को लेकर फिलहाल कोई लिखित निर्देश नहीं मिले हैं, हां अगर सीएम एेसी अपील कर रहे हैं तो मैं भी जल्द सहमति दूंगा।
-हरदयाल कंबोज, राजपुरा
रुटीन में इनकम टैक्स की रिटर्न फाइल करता रहा हूं, इस बार भी कर दिया है। -संजय तलवाड़, लुधियाना ईस्ट (कांग्रेस)
अगर कोई पत्र आएगा या कोई अफसर ऐसा कहेगा ताे खुद रिटर्न भर दूंगा। इसे लेकर अभी पार्टी से चर्चा नहीं हुई है।
-अरुण नारंग, अबोहर (बीजेपी)
सीएम के हर आदेश पर अमल करते हैं, यह अपील तो वैसे भी पारदर्शिता के लिए उठाया कदम है, टैक्स भर दिया है।
-भारत भूषण आशू, कैबिनेट मंत्री
सरकार का ही फर्ज है कि वह टैक्स काटकर ही सैलरी दे। यह कोशिश स्वागत योग्य है। आगे से टैक्स मैं खुद ही भरूंगा। -एसएस फूलका, दाखा (आप)
रूटीन की तरह इस बार भी रिटर्न फाइल कर दी है।
-शरणजीत सिंह ढिल्लों, साहनेवाल (शिअद)
सीएम की अपील पर मैं टैक्स खुद भरने को तैयार हूं। कुछ दिन में मैं सहमति दे दूंगा। अौपचारिकता पूरी करने में थोड़ा वक्त लगा।
-काका राजिंदर सिंह, समाना
इस बार सरकार ने ही मेरा टैक्स भरा है। अगली बार जब विधायकों के टैक्स भरने का प्रस्ताव आएगा तो सबसे पहले भरुंगी। -सरबजीत कौर माणुके, जगराआें (आप)
विधायकों को गंभीरता से लेनी चाहिए अपील
हां, यह सही है कि सिर्फ 1 विधायक ने ही अपनी सैलेरी के इनकम टैक्स को खुद अपनी जेब से भरने की स्वीकृति दी है। इसके अलावा फिलहाल हमें किसी अन्य विधायक का सहमति पत्र नहीं मिला है। मुख्यमंत्री ने ये अपील की थी इस पर विधायकों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
- शशि लखनपाल मिश्रा, सचिव पंजाब विधानसभा

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