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HARYANA-मंडी में टमाटर के रेट धड़ाम, भावांतर के नियम में उलझे किसान, जे फाॅर्म ने बिगाड़ा खेल

May 10, 2018 05:11 AM

COURSTEY DAINIK BHASKAR MAY 10

मंडी में टमाटर के रेट धड़ाम, भावांतर के नियम में उलझे किसान, जे फाॅर्म ने बिगाड़ा खेल

आढ़ती मार्केट फीस बचाने के लिए नहीं करते जे फार्म पर साइन, अधिकारी बिना जे फार्म योजना का लाभ देने से कर रहे मना

भास्कर न्यूज | पानीपत

किसानोंं को राहत देने के लिए शुरू की गई भावांतर भरपाई योजना जिले में फेल हो गई है। सब्जी मंडी में किसानोंं को उनकी फसलों का उचित दाम मिलता तो दूर, फसल की खरीद ही नहीं हो रही है। परेशान किसान फसल को सड़क पर फेंकने के लिए मजबूर हैं।
मंडी में सब्जियों की कम कीमत होने पर किसानोंं को नुकसान न उठाना पड़े, इसलिए चार फसलों आलू, प्याज, टमाटर और फूलगोभी के रेट निर्धारित किए थे। इसका उद्देश्य सब्जी उत्पादक किसानोंं के जोखिम को कम करना था। इस योजना के तहत चारों फसलों पर प्रति एकड़ 48 हजार से 56 हजार आमदनी सुनिश्चित करना था, लेकिन धरातल पर किसानों के लिए यह योजना मात्र एक दिखावा बनकर रह गई है। योजना में कुछ दम न दिखने के कारण किसानो का इससे मोह भंग होता जा रहा है। हालांकि इस योजना के तहत किसान प्रदेश में किसी भी मार्केट कमेटी में रजिस्ट्रेशन करवाकर किसी भी मंडी में जाकर फसल बेच सकता है। लेकिन सब्जी मंडी में किसानों को रजिस्ट्रेशन होने के बावजूद जे-फार्म नहीं मिल रहा है। इससे किसान परेशान हैं।
सभी किसान नहीं करवा पाए थे रजिस्ट्रेशन, जिन्होंने कराया उन्हें नहीं मिल रहे जे फार्म
प्रदेश की मंडियों में 50 पैसे प्रति किलो बिक रहा टमाटर
प्रदेश की विभिन्न मंडियों में अभी टमाटर के रेट बुरी तरह पिटे हुए हैं। मंडियों में किसानो का टमाटर मुश्किल से होल सेल में 50 पैसे प्रति किलो बिक रहे हैं। इससे किसानों का खर्च भी नहीं निकल रहा है। किसानों का कहना है कि सरकार आय दोगुनी करने के वादे कर रही है। हकीकत यह है कि हम अपना खर्च भी नहीं निकाल पा रहे है। प्रदेश में वर्ष 2016-17 के विभागीय आंकड़ों अनुसार 31699 हैक्टेयर में टमाटर की खेती की गई, जिससे पिछले 638277 टन टमाटर का उत्पादन हुआ था।
प्रदेश में केवल 9 हजार 438 किसान योजना में शामिल
भावांतर योजना का यह पहला वर्ष है। इसलिए किसानों को इस योजना के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। इसलिए समय पर किसान रजिस्ट्रेशन नहीं करवा पाए। सभी चार फसलों को मिलाकर छंटनी के बाद प्रदेश में केवल 9 हजार 438 किसान योजना में शामिल रह गए हैं। यह सब्जी की खेती करने वालों का बहुत कम प्रतिशत है। वहीं जिन किसानों ने इस योजना में रजिस्ट्रेशन करवा रखा है उन्हें इस योजना के जटिल नियमों के चलते इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
किसानों से सस्ते में खरीद कर आढ़ती कमा रहे मुनाफा
प्रोत्साहन के लिए जे-फार्म पर बिक्री अनिवार्य है।
जे-फार्म पर बिक्री उपरांत बिक्री विवरण बीबीवाई के ई-पोर्टल से लेना होगा।
जे-फार्म पर बिक्री और निर्धारित उत्पादन प्रति एकड़ (जो भी कम होगा) को भाव के अंतर से गुना करने पर प्रोत्साहन देय है।
प्रोत्साहन राशि किसान के आधार लिंकड बैंक खाते में देने का प्रावधान है।
औसत दैनिक थोक मूल्य मंडी बोर्ड द्वारा चिन्हित मंडियों के दैनिक भाव के आधार पर निर्धारित होना है।
ये हैं योजना के नियम
जे फार्म बना बड़ी बाधा, आढ़ती नहीं कर रहे साइन
टमाटर के सीजन में इस योजना की हकीकत जानने के लिए मंडी में गए तो सामने आया कि जे फार्म किसानों के लिए सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को पहले तो पोर्टल से जे फार्म लेना पड़ता है, जो कई बार नहीं मिल पाता। अगर मिल जाता है तो आढ़ती उस पर साइन करने से आनाकानी कर रहे हैं। कारण खोजने पर सामने आया कि आढ़ती को अपने बिक्री रेट पर मार्केट फीस देनी होती है और जे फार्म भरने पर उसकी बिक्री मार्केटिंग बोर्ड को पता चल जाती है। इस फीस से बचने के लिए आढ़ती जे फार्म पर साइन नहीं कर रहे। वहीं इस योजना में लाभ किसान के बेचे गए रेट पर नहीं बल्कि जे फार्म अनुसार आढ़ती ने जिस रेट पर बिक्री की है, उसके अंतर का ही लाभ मिल रहा है।
किसानों को ठग रही सरकार : भाकियू अध्यक्ष रतन मान सिंह
भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष रतन सिंह मान का कहना है कि भावांतर भरपाई योजना सिर्फ ढोंग है और इससे सरकार किसानों को ठग रही है। आम आदमी की नजर में किसानोंं के लिए सरकार काम कर रही है। सच्चाई यह है कि इस योजना के तहत किसी भी फसल का दस मंडियों का औसत निकाला जाएगा। उसके आधार पर जिस भी मंडी का जो न्यूनतम भाव होगा और सरकार द्वारा फसल का जो निर्धारित भाव होगा। उसके बीच का जो अंतर रहेगा, किसान को सिर्फ उसी की भरपाई की जाएगी। सरकार किसानों से धोखा कर रही है और इसको लेकर जल्द ही बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा।
ये कहते हैं
नहीं आने देंगे परेशानी : कृषि मंत्री धनखड़
योजना को लेकर कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ का कहना है कि अगर भावांतर भरपाई योजना के तहत पंजीकृत किसी किसान को जे-फार्म नहीं मिला है तो उसे अवश्य मिलेगा और फसल के भाव के अंतर की भरपाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर भावांतर भरपाई में पंजीकृत किसान छूट गया है तो उसे घर जाकर भी जे-फार्म दिया जाएगा। योजना में अगर कहीं सुधार करने की जरूरत हुई तो उसे भी देखा जाएगा

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