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Haryana

ROHTAK-रेलवे एलीवेटेड ट्रैक प्रोजेक्ट की पहली बड़ी मार

May 08, 2018 05:33 AM

COURSTEY DAINIK BHASKAR MAY 8

राजेश कौशल | रोहतक 

शहर के सबसे बड़े प्रोजेक्ट में से एक रेलवे के एलीवेटेड ट्रैक की पहली बड़ी मार गांधी कैंप एरिया के 70 दुकानदारों और 10 मकान मालिकों पर पड़ी है। गांधी कैंप में गोहाना रेलवे लाइन के किनारे बसे 10 मकानों और 70 दुकानों पर रेलवे ने 7 दिन के अंदर जमीन खाली करने के नोटिस चस्पा किए हैं। सेक्शन इंजीनियर कार्यालय पीवे गोहाना की ओर जारी नोटिस में ऐसा नहीं करने पर पीपीआई एक्ट के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। दूसरी ओर दुकानदार व मकान मालिकों ने 60 वर्ष पुरानी रजिस्ट्री के कागजात दिखाते हुए कमेटी से मालिकाना हक पाने का दावा किया है। शहर के अंदर पड़ने वाली 5 रेलवे क्रासिंग से निजात दिलाने के लिए भाजपा की प्रदेश सरकार की पहल पर रेलवे ने रोहतक-गोहाना रेलवे लाइन पर देश का पहला एलीवेटेड रेलवे ट्रैक बनाने का निर्णय किया। 18 मार्च को मुख्यमंत्री मनोहर लाल की ओर से शिलान्यास किए जाने के बाद एलीवेटेड रेलवे ट्रैक की निर्माण प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सरकुलर रोड पर डबल फाटक से सेक्टर 6 में रेलवे ओवर ब्रिज के बीच लगभग साढ़े 5 किमी में बनने वाले एलीवेटेड रेलवे ट्रैक के दोनों तरफ आरई वाॅल बनाने के बाद पिलरों पर ट्रैक बिछाया जाएगा। बजरंग भवन से न्यू चिन्योट कॉलोनी के बीच पड़ने वाली जिन दुकानों को नोटिस भेजे गए हैं, उनके पिलर के ऊपर रेलवे ट्रैक के नीचे आने की आशंका है। इस वजह से निर्माण से पहले ही उन्हें रेलवे की जमीन खाली करने के आदेश दिए गए हैं। इधर नरेश नागपाल, देशराज, राजाराम, पवन कुमार, वेद प्रकाश, पंकज आहूजा, जयपाल धींगड़ा, मनोज, अजय व प्रवीन आदि दुकानदारों ने सोमवार को नगर निगम कार्यालय पहुंचकर डीटीपी केके वार्ष्णेय से मुलाकात की। बाद में निगम की टैक्स ब्रांच और पटवारी की टीम ने मौके का मुआयना भी किया।
68 साल से काबिज 70 दुकानदारों और 10 मकान मालिकों को सात दिन में खाली करनी होगी जगह
विभाजन के बाद पाकिस्तान से आकर गांधी कैंप में बसाए गए थे परिवार
रोहतक. गांधी कैंप एरिया में गोहाना रेलवे लाइन के दोनों तरफ बनीं दुकानें और मकान।
गोहाना रेलवे ट्रैक बनने के 50 साल बाद
अब रेलवे ने संभाली जमीन
1947 में देश विभाजन के समय फैले दंगे में पाकिस्तान के झंग जिले से विस्थापित हुए सैकड़ों परिवारों को शहर के गांधी कैंप इलाके में आबाद किया गया था। तब बजरंग भवन से चिन्योट कॉलोनी की तरफ के इलाके में वन था। इसके बाद 50 के दशक में तत्कालीन नगर पालिका कमेटी ने यहां बाजार का एरिया चिह्नित करते हुए दुकानें लोगों को बेच दी। रजिस्ट्री के कागज में लगे नक्शे में दुकानों को चिह्नित करने के साथ ही रेलवे लाइन की जमीन को भी दर्शाया गया है। बाद में रेलवे ने रोहतक-गोहाना रेलवे लाइन बिछाने का फैसला किया। ट्रैक के लिए जमीन एक्वायर की। गोहाना रेलवे ट्रैक चालू होने के बाद से अब तक रेलवे ने कभी अपनी जमीन की फिक्र नहीं की और ट्रैक के किनारे दुकानदारों ने अपने ढंग से दुकानों को विस्तार दे दिया। रेलवे एलीवेटेड रेलवे ट्रैक के निर्माण को देखते हुए अब रेलवे अपनी जमीन पाने को फिक्रमंद हुआ है।
रेलवे ने नोटिस जारी कर दुकान व मालिकों को बताया अवैध कब्जाधारी
मकानों के कागजों की पड़ताल के बाद होगी जमीन की पैमाइश...
गोहाना रेलवे लाइन के किनारे जिन दुकानदारों व मकान मालिकों को रेलवे की ओर से नोटिस मिले हैं, सोमवार को उनमें से कुछ दुकानदारों ने नगर निगम कार्यालय आकर मुलाकात कर मामले की जानकारी दी है। कागजों की पड़ताल करवाते हुए निशानदेही और पैमाइश कराई जाएगी।। -केके वार्ष्णेय, डीटीपी नगर निगम
बेघर होने का डर :जिन दुकानों व मकानों को रेलवे की ओर से जमीन खाली करने के आदेश दिए गए हैं। ऐसा होने पर रेलवे लाइन के किनारे पुरानी गांधी कैंप पुलिस चौकी से लेकर विमल मिनोचा की दुकान के बीच आने वाले लोग बेरोजगार हो जाएंगे। उनका आशियाना भी छिनेगा। लोगों के सामने अचानक ये नई मुसिबत आ गई है।
76 वर्ष कश्मीरी लाल बोले-दिव्यांग बेटी को कहां रखूंगा
76 वर्षीय कश्मीरी लाल के परिवार के 10 सदस्यों का परिवार कबाड़ी की दुकान से चलता है। उनकी दुकान तोड़ने की रेलवे ने नोटिस दे रखी है। उनकी 38 वर्षीय बेटी रंजना शत प्रतिशत दिव्यांग है। चलने-फिरने में असमर्थ होने के साथ ही हर महीने उसके इलाज पर हजारों रुपए का खर्च भी आता है। टूटने पर दोबारा दुकान बनाने की पूंजी नहीं है। इस हालात में दिव्यांग बेटी को कहां रखूंगा।
50 के दशक में नगर पालिका ने नक्शे बनाकर जमीन की कराई थी रजिस्ट्री
रेलवे लाइन बिछने से पहले बनीं दुकानेंपहले गांधी कैंप में बजरंग भवन से होकर रेलवे लाइन नहीं बिछी थी। इसके पहले ही तब की नगर पालिका कमेटी की ओर से गांधी कैंप में बाजार की जगह चिह्नित कर उसका मालिकाना हक खरीदारों को बेचा गया। 83 वर्षीय देशराज ने बताया कि उनके दुकान की रजिस्ट्री एक जनवरी 1956 की है। इसमें मात्र 70 रुपए में सवा 14 गज दुकान के मालिकाना हक का जिक्र है।
विधवा नीलम बोली- बीमार बेटे का इलाज कैसे कराएं
विधवा नीलम ने कहा कि 5 मई को रेलवे के अधिकारी मकान तोड़ने की नोटिस चस्पा करके गए हैं। रजिस्ट्री के कागजात दिखाने पर उन्हें बताया गया कि मकान रेलवे की जमीन में है। इसीलिए जरूर हटाया जाएगा। घर में 28 वर्षीय एक बेटा रोमी मानसिक रूप से दिव्यांग है। उसके इलाज पर हर माह दो हजार से ढाई हजार रुपए का खर्च आता है।
निगम करता है टैक्स वसूल
दुकानदारों व मकान मालिकों ने बताया कि बाकायदा नगर निगम की ओर से उन्हें हाउसटैक्स के बिल भेजे जाते हैं। इसका उन्होंने समय समय पर भुगतान भी किया है। दुकानदार नरेश नागपाल ने वर्ष 2016 में दुकान के ऊपर मकान का निर्माण करवाया तो उन्हें भेजे गए नोटिस के एवज में नगर निगम से नक्शा पास कराना पड़ा। बदले में उनसे 18 हजार 395 रुपए नक्शे और 2916 रुपए टैक्स के वसूले गए। डॉ. राजेंद्र, पंकज आहूजा, श्याम खुराना, पाली दाल वाला, सचिन व श्याम बधवा ने भी दुकान के ऊपर मकान बनाए हैं।

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