Monday, November 19, 2018
Follow us on
International

मई दिवस - मजदूरों पर अत्याचार

May 01, 2018 08:01 AM

दिन था 1मई 1886 का और स्थान था शिकागो का मार्किट चौराहा ,जहां पर वो बेचारे कई दिनों से लड़ रहे थे ब्रेड, सॉसेज, कपड़ा और न जाने किस किस तरह की फैक्ट्रियों के मजदूर थे वे। सूरज उगने से पहले काम के लिए निकलते थे और डूबने के काफी देर बाद घर वापस लौटते थे। अपने बच्चों की उम्र बढ़ने का अंदाजा वे नाप से ही निकालते थे क्यूंकि उन्हें सोता हुआ छोड़ कर जाते थे उनके सो जाने के बाद ही काम से लौट पाते थे। उनकी मांग थी कि काम के घंटे 12-14 नहीं, आठ होने चाहिए। उनका नारा था आठ घंटे काम, आठ घंटे जीवन और बाकी मनोरंजन, आठ घंटे आराम । जब मालिकों ने नहीं सुनी तो इसी मांग को लेकर पहली मई को उन्होंने हड़ताल करके शिकागो के हे मार्किट चौराहे पर बड़ी सी सभा की। सभा अच्छी खासी चल रही थे कि अचानक उसमे मालिकों के भेजे गुर्गों ने उत्पात मचाना शुरू कर दिया। उन्ही में से किसी ने भीड़ पर एक बम फेंका पुलिस ने गोलीबारी शुरू कर दी जिसमे कई लोगों की मौत हो गयी। इसी हादसे में मारे गए एक मजदूर की खून में भीगी कमीज को झंडे की तरह लहरा कर शिकागो के मजदूरों ने दुनिया के अपने भाई-बहिनों को उनके संघर्ष का प्रतीक लाल झंडा थमा दिया। इस दमन के खिलाफ 1886 की चार मई को रात 8:30 बजे शिकागो के हेमार्केट पर फिर मजदूर रैली हुई। एक ट्रक के ऊपर खड़े होकर करीब 2500 लोगों की भीड़ को संबोधित करते हुए एक स्थानीय अखबार के संपादक आगस्त स्पाइज ने एक और तीन मई को हड़ताली मजदूरों पर चलाई गोली का विरोध किया। उनके बाद मजदूर नेता अल्बर्ट पार्सन्स बोले। आखिर में एक मेथोडिस्ट उपदेशक सैमुअल फील्डेन ने भाषण दिया। करीब 10:30 बजने को थे, फील्डेन का भाषण खत्म होने को ही था, सभा में मुश्किल से कुल जमा 200 लोग ही बचे थे। तभी अचानक 178 हथियार बंद पुलिस वालों ने इस मासूम सी भीड़ पर हमला बोल दिया। इस बीच किसी ने डायनामाइट बम फेंक दिया। बाद में पता चला कि कारखाना मालिकों के किसी गुर्गे ने यह हरकत की थी। बम पुलिस के बीचों बीच गिरा। बदहवास पुलिस बल ने अंधाधुंध गोली चलाकर न सिर्फ चार मजदूरों को मार डाला बल्कि खुद अपने छह पुलिस वालों की जान ले ली।इसके बाद शुरू हुआ अमेरिकी इतिहास का सबसे बर्बर दमन और पूंजीवादी सत्ता का नंगा नाच। आठ मजदूर नेताओं पर मुकदमें चलाए गए जिनमें से चार को 11 नवम्बर 1887 को फांसी पर लटका दिया गया। एक दिन पहले इनमें से एक लुईस किंग को उनकी जेल कोठरी में मृत पाया गया। इस निर्मम दमन और पूंजीवाद के अमानवीय चेहरे के खिलाफ दुनिया भर में विरोध कार्यवाहियां आयोजित की गई और कुछ ही वर्ष में इसने पूंजीवाद के विरूद्ध मजदूर वर्ग के अंतर्राष्ट्रीय दिवस मई दिवस का रूप धारण कर लिया।

Have something to say? Post your comment
 
More International News
करांची: पाकिस्तानी समुद्री सुरक्षा एजेंसी ने 12 भारतीय मछुआरों को पकड़ा अमेरिका में एक भारतीय की गोली मारकर हत्या जकरबर्ग पर चेयरमैन पद छोड़ने का दबाव ! किम जोंग के सुपरविजन में उत्‍तरी कोरिया ने नए हथियार हाईटेक का किया परिक्षण Japan’s cybersecurity min has never used computers श्रीलंका में राजनीतिक संकट गहराया, रानिल विक्रमसिंघे के समर्थक सड़कों पर उतरे पीएम मोदी सिंगापुर में आसियान-इंडिया इनफॉर्मल ब्रेकफास्ट समिट में शामिल हुए श्रीलंकाई संसद ने राजपक्षे सरकार के खिलाफ वोट किया वंचितों के विकास से ही सबके विकास का सपना होगा पूरा-मोदी सिंगापुर में PM नरेंद्र मोदी: मुद्रा लोन में 75 फीसदी लोन महिलाओं को दिया गया