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Haryana

PANIPAT=टेक्सटाइल का ट्रेडिंग हब बना पानीपत, मैन्युफैक्चरिंग से टूटा मोह

April 29, 2018 06:12 AM

टेक्सटाइल का ट्रेडिंग हब बना पानीपत, मैन्युफैक्चरिंग से टूटा मोह

उद्योगों की इन समस्याओं के कारण व्यापारियों का हुआ मोहभंग 1’ यहां के उद्यमी उत्तर प्रदेश के मेरठ से कपड़ा बनवा कर बेचते हैं। मेरठ में एक लूम का बिजली बिल 250 रुपये प्रतिमाह आता है, जबकि पानीपत में यही 10 हजार रुपये आता है। 1’ मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में उद्योग लगाने पर 40 फीसद सब्सिडी मिल रही है। इसीलिए वहां बना कपड़ा भी पानीपत में बिक रहा है। 1’ औद्योगिक उत्पादन कम होने का कारण नया इंडस्ट्रियल सेक्टर नहीं कटना भी माना जा रहा है। जमीन न होने के कारण नए उद्योग तो आने बंद हो चुके हैं। 1’ उद्योगों को प्रशिक्षित वर्कर नहीं मिल पा रहे। उद्योग बंद कर उद्यमियों ने ट्रे¨डग क्षेत्र को अपनाया है।
जागरण विशेष
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महावीर गोयल’ पानीपत 1हैंडलूम सिटी के नाम से देश विदेश में विख्यात पानीपत सिटी अब ट्रे¨डग का हब बन चुका है। पिछले छह वर्षो में यह बदलाव शहर को देखने को मिला है। पानीपत के पावरलूम उद्योग की एक तिहाई इकाईयां बंद हो चुकी हंै। उद्यमी अब ट्रे¨डग कर रहे हैं। 1 बेडशीट, कंबल, पर्दे का कपड़ा व तौलिया सहित अन्य टेक्सटाइल उत्पाद, जिनके उत्पादन के लिए यहां के उद्योग देश में अग्रणीय स्थान पर थे, अब वह उत्पादन क्षेत्र में बढ़ती समस्याओं को देखते हुए ट्रे¨डग के क्षेत्र में कूद रहे हैं। मुंबई की बनी बेडशीट, पर्दे का कपड़ा, मेरठ का बना कपड़ा, जयपुरी चादर से लेकर कारपेट तक अब अन्य प्रदेशों से मंगवा कर यहां बेचा जा रहा है। कारपेट बनाने में पानीपत का विशेष स्थान था, लेकिन अब यहां चीन के बने कारपेट बिक रहे हैं। ट्रे¨डग हब बनने से इंडस्ट्री विभाग में इक्का-दुक्का उद्योग की रजिस्ट्रेशन ही हो रही है। टेक्सटाइल उत्पादन के कारण यहां लाखों लोगों को रोजगार मिला था। अब ट्रे¨डग हब बनने के कारण रोजगार में भी कमी आ रही है। पिछले छह वर्ष से निर्यात भी स्थिर है। छह हजार करोड़ निर्यात का आंकड़ा बढ़ ही नहीं पा रहा। टेक्सटाइल सिटी होने से अन्य प्रदेशों से अधिक ग्राहक यहां माल खरीदने के लिए आते हैं। उत्पादन महंगा होने के कारण अब यहां के उद्यमियों ने अन्य प्रदेशों से लाकर माल बेचना शुरू कर दिया है। अकेले ऑनलाइन मार्केट में पानीपत से तीन हजार करोड़ रुपये का माल बिकता है। 1हजार करोड़ का है निर्यात का आंकड़ा1हजार करोड़ का माल बिकता है ऑनलाइन मार्केट मेंपानीपत का हैंडलूम मार्केट।मध्य प्रदेश में नई टेक्सटाइल यूनिट लगाने पर 40 फीसद सब्सिडी मिल रही है। बिजली भी सस्ती है। लाल फीताशाही के कारण उत्पादन में रुचि कम हो रही है। मनरेगा लागू होने के बाद लेबर की समस्या होने के कारण उद्योग के स्थान पर उद्यमी ट्रे¨डग क्षेत्र को अपना रहे हैं। आरबी गुप्ता, प्रधान, एकता वेलफेयर एसोसिएशन।कंबल, थ्री-डी चादर की ट्रे¨डग अधिक1चीन का बना कंबल व थ्री डी चादर यहां की निर्मित चादर व कंबल की तुलना में अधिक बिक रहा है। यहां की बेडशीट शादी विवाह में देने के काम आती थी। अब उसका स्थान चीन की बनी थ्री डी चादर ने ले लिया है। ये चादर पानीपत में बनने वाली चादर से सस्ती पड़ती है और देखने में इसका लुक अच्छा है। इसीलिए थ्री डी चादर की मांग अधिक रहती है।1

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