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Haryana

आईएएस खेमका ने विजिलेंस जांच कराई तो हुआ खुलासा -पंचकूला में एफआईआर दर्ज

April 05, 2018 04:48 AM

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‌Rs.2.83 लाख के शोकेस, पेडस्टल के लिए 14.62 लाख रुपए किया भुगतान, पंचकूला में एफआईआर दर्ज

पुरातत्व विभाग में घोटाला पार्ट-2

यमुनानगर व राई के संग्रहालय के लिए मंगाया गया था सामान फॉरेस्ट कॉर्पोरेशन ने भी थर्ड पार्टी फर्म से खरीदा था माल

वैभव शर्मा | हिसार

यमुनानगर के कपालमोचन स्थित गुरु गोबिंद सिंह मार्शल आर्ट संग्रहालय और साेनीपत के राई के बड़खालसा मेमोरियल के लिए शोकेस व पेडस्टल आदि सामान की खरीद के लिए 14.62 लाख रु. का भुगतान किया गया। जबकि विजिलेंस जांच में पता चला कि सामान की कीमत 2.83 लाख रु. ही थी। 2011 का मामला तब खुला, जब पुरातत्व विभाग में आईएएस अशोक खेमका को डीजी लगाया गया। खेमका ने इन संग्रहालयों का निरीक्षण किया तो शोकेस व पेडस्टल की क्वालिटी अच्छी नहीं मिली। विजिलेंस जांच में गड़बड़झाला मिलने पर पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर रणवीर सिंह व जेपी इंडस्ट्रीज पंचकूला पर धारा 409, 420, 468, 471, 120बी के तहत केस दर्ज किया गया है।
उच्चाधिकारियों के कार्यालय से लेकर लघु सचिवालय तक इसी फर्म का फर्नीचर
सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में सरकारी विभागों से लेकर अधिकारियों के कार्यालय तक जेपी इंडस्ट्रीज का ही फर्नीचर लगा है। जब भी अधिकारियों को कोई फर्नीचर खरीदना होता है तो वे वन विभाग के फॉरेस्ट कार्पोरेशन के पास जाकर कोटेशन मांगते हैं और यह कार्पोरेशन खुद फर्नीचर न बनाकर इस फर्म से फर्नीचर आउटसोर्स करता है।
आईएएस खेमका ने विजिलेंस जांच कराई तो हुआ खुलासा
देहरादून से कराई सामान की जांच
वर्ष 2011 में गुरु गोबिंद सिंह मार्शल आर्ट संग्रहालय व बड़खालसा मेमोरियल के लिए 30 शोकेस व 13 पेडस्टल खरीद का प्रस्ताव वास्तुकला सहायक वेदपाल ने पुरातत्व विभाग के उच्चाधिकारियों को भेजा। इस पर डिप्टी डायरेक्टर रणवीर सिंह ने 15 लाख रु. खर्च होने की बात कही। इसे तत्कालीन महानिदेशक फतेह सिंह डागर को भेजा गया। उन्होंने बजट के लिए वित्तायुक्त व पुरातत्व विभाग के प्रधान सचिव विजय वर्धन को फाइल भेजी। उन्होंने 21 मार्च 2011 को इसे पास कर दिया। विभागीय अधिकारियों ने 14.99 लाख रु. की कोटेशन भेजी। इसमें कटिंग कर 14.62 लाख रु. फाइनल किया। 4 जुलाई 2011 को हरियाणा फॉरेस्ट डिवेलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड को 14.62 लाख र. की राशि का डीडी दे दिया। जांच में पाया गया कि फर्नीचर हरियाणा फॉरेस्ट कॉर्पोरेशन ने नहीं बनाया, बल्कि पंचकूला की जेपी इंडस्ट्रीज से बनवाया गया। फर्म ने 8 शोकेस बड़खालसा मेमोरियल व 5 शोकेस गुरु गोबिंद सिंह मार्शल आर्ट संग्रहालय को भेजे। जबकि 15-15 कुल 30 शोकेस बनाए जाने थे। जांच में पता चला कि 30 के स्थान पर 13 शोकेस देने पर ही फॉरेस्ट कॉर्पोरेशन को एनओसी खुद तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर ने दे दी। यानी बता दिया गया कि जितना माल खरीदा जाना था, उतना प्राप्त हो चुका है। जबकि असल में यह माल आया ही नहीं। आईएएस खेमका ने सामान की गुणवत्ता की जांच देहरादून स्थित फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के काष्ट शरीर शाखा से कराई। यह सामान टीक की लकड़ी से बनना था, जो देवदार की लकड़ी से बनाया गया। इसकी कीमत वन विभाग के अधिकारियों से लगवाई गई तो पैडस्टल व शोकेस में लगी सामग्री की कीमत कमेटी ने कुल 2.83 लाख रुपए लगाई है।

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