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Haryana

कृषि शिखर सम्मेलन में कृषि के साथ-साथ सब्जी एवं फलों से बने उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए दूसरे सभागार में सेमिनार का आयोजन किया गया

March 25, 2018 04:21 PM

हरियाणा के रोहतक में आयोजित किए जा रहे कृषि शिखर सम्मेलन में कृषि के साथ-साथ सब्जी एवं फलों से बने उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए दूसरे सभागार में सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में किसानों को कृषि विशेषज्ञ बागवानी अनुसंधान केन्द्र मुम्बई के निदेशक डॉ.एस.के.मल्होत्रा, महाराणा प्रताप बागवानी महाविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ.राजबीर पान्नू, वैज्ञानिक डॉ. भुवनेश कोहली, डॉ. अजय यादव, कैप्टन कमलेश खोरी, डॉ. रमेश कुमार ने विस्तार से किसानों को कृषि लागत कम करके आमदनी बढ़ाने पर बल दिया। 

बागवानी के महानिदेशक डॉ. अर्जुन सिंह सैनी की अध्यक्षता में आयोजित इस सेमिनार में उन्होंने कहा कि कृषि व्यवसाय के साथ-साथ कृषि सम्बंद्ध व्यापार शुरू करना चाहिए। किसान अपने उत्पादों को प्रोसेसिंग के जरिए मार्किट में उतारेंगे तो कई गुणा मुनाफा लिया जा सकता है। गन्ना किसानों को गुड़ व खाण्ड बनाने के लिए कोल्हू चलाने चाहिए ताकि उन्हें मार्किटिंग की उचित व्यवस्था मिलने के साथ-साथ इससे बने हुए उत्पाद को अच्छी आमदनी से बेचा जा सके। इसी प्रकार सरसो उत्पादित क्षेत्रों में तेल निकालने के डिपू, चन्ना उत्पादक क्षेत्रों में छोटी दाल मिल तथा गेंहू उत्पादक क्षेत्रों में फ्लोर मिल लगाकर अपने व्यवसाय को बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में सब्जी का अधिक उत्पादन होता है, उनमें किसानों को आलू से बने चिप्स जैसे उत्पादों की प्रोसेसिंग करनी चाहिए। इनसे किसानों की फसलें भी बर्बाद नहीं होगी और उन्हें उचित दाम भी मिलेंगे। 
उन्होंने कहा कि किसानों को वर्तमान सूचना प्रौद्योगिकी के समय में घर बैठे ही पोर्टल के माध्यम से मार्किटिंग पर चौकसी रखनी चाहिए। यदि कोई व्यापारी किसान के खेत से ही माल उठाने का लालच देता है तो वह भी किसानों के हित में नहीं है। बागवानी की अधिकांश फसलों के बीच में अन्य फसलों को उगाकर किसान जमीन की उपजाऊ एवं उर्वरा शक्ति बढ़ाने के साथ-साथ करोड़ों रूपए की आमदनी भी कमा सकते हैं। फसल विविधिकरण, मार्किटिंग की चौकसी और मंडीकरण की जानकारी किसानों के लिए वरदान साबित होगी। उन्होंने कहा कि किसानों को अपना माल मंडी में ले जाने के लिए चैन सप्लाई सिस्टम अपनाना चाहिए। इसके माध्यम से किसान को कभी भी नुकसान से नहीं गुजरना पड़ेगा। 
सेमिनार में वैज्ञानिकों ने यह भी सुझाव दिए कि समय की नजाकत को समझते हुए अपने खेतों में मांग अनुसार ही सब्जियों एवं फलों की बिजाई करनी चाहिए। विशेषकर खूम्बी, शिमला मिर्च, भिंडी जैसे उत्पादों की हमेशा कमी रहती है। इसी प्रकार फलों में स्ट्राबेरी व फूलों में गुलाब एवं चन्दन के फूलों की खेती की डिमांड सदैव बनी रहती है। उन्होंने कहा कि किसानों को अच्छे दाम लेने के लिए सामूहिक पैक हाउस बनाकर अपने फल एवं फूलों की ग्रेडिंग अनुसार पैकिंग करनी चाहिए। पैकिंग में ग्रेडिंग के अनुसार भी किसान बेहतर लाभ कमा सकते हैं। वैज्ञानिकों ने किसानों को कोल्ड स्टोरेज पर भी बल देने का आह्वान किया। 
सेमिनार में फसल प्रबंधक, रोग मुक्त खेती, कम लागत पर बेहतर आमदनी, सामूहिक पैट हाउस, मार्किंटिंग इंटेलेजेंसी, कृषि सम्बद्व उत्पादों पर किसानों ने सवाल-जवाब किए वैज्ञानिकों ने उनके खुलकर जवाब देते हुए किसानों को संतुष्ट किया
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