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Haryana

HARYANA-18 माह में प्रदेश की 430 महिलाएं कोर्ट से जीत कर वापस पहुंचीं ससुराल

February 26, 2018 06:11 AM

COURSTEY  DAINIK  BHASKAR   FEB 26

18 माह में प्रदेश की 430 महिलाएं कोर्ट से जीत कर वापस पहुंचीं ससुराल

राजेश खोखर | पानीपत

13 साल पहले साल 2005 में महिलाओं को घरेलू हिंसा से सुरक्षा दिलाने के मकसद से घरेलू हिंसा अधिनियम लाया गया था। इस कानून के प्रति अब महिलाएं जागरूक हो रही हैं। अलग-अलग कारणों से ससुराल से निकाली जा चुकी महिलाएं कोर्ट जाकर ससुराल में रहने का हक मांग रही हैं। कोर्ट उन्हें अपनी हैप्पी फैमिली से मिला भी रही है। हरियाणा में भी इस एक्ट को 2008 में लागू कर दिया गया था। यहां महिलाओं को इस एक्ट की इतनी जानकारी नहीं थी। ससुराल से निकाले जाने पर कोर्ट से ससुराल में रहने का हक लेने के अधिकार की जानकारी महिलाओं को नहीं थी। अब महिलाओं को इसकी जानकारी हुई कि वे अपने ससुराल में अलग से अपना हक लेकर रह सकती हैं।
13 साल पहले बने एक्ट के प्रति महिलाएं अब हुईं जागरूक, कोर्ट मिला रही हैप्पी फैमिली, ससुराल आने का पा रहीं अधिकार
हिम्मत जुटाकर
जीत रहीं जीने का हक
जैसे ही एक-एक कर इस तरह के मामलों में कोर्ट के फैसले आने लगे और उन्हें ससुराल में रहने का हक मिला। कई ऐसी महिलाएं सामने आईं, जो ससुराल से निकाली गई थीं और वर्षों से मायके में अकेली रहती थीं। वो भी अपनी हिम्मत जुटा रही हैं और ससुराल में रहने का हक प्राप्त कर रही हैं। यही कारण है कि इस तरह के मामलों में पीछे कुछ समय में काफी इजाफा हुआ है। पिछले 18 महीने में प्रदेश में इस तरह 430 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें महिलाओं ने कोर्ट के माध्यम से ससुराल में रहने का हक जीता है। वहीं इससे भी कहीं ज्यादा महिलाओं के इस हक के लिए कोर्ट में केस चल रहे हैं। ये सभी वो महिलाएं हैं, जिनमें से किसी को उसके पति की मौत के बाद घर से निकाला गया था तो किसी को दहेज के चक्कर में या फिर किसी के पति ने शराब के चक्कर में पीट कर निकाल दिया था।
जानिए... कोर्ट पीड़ित महिला को वित्तीय मदद भी दिलाती है
केस 1
पानीपत की एक महिला की दिल्ली में शादी हो रखी थी, लेकिन उसके परिवार ने कई वर्षों से उसे निकाल रखा था। उसके मामले में कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को आदेश दिए थे कि महिला को उसकी ससुराल छोड़ कर आए। दिल्ली पुलिस बार-बार रिपोर्ट देती रही कि घर पर ताला लगा है, इसलिए नहीं छोड़ सकते। महिला ने हार नहीं मानी और फिर से कोर्ट में इसकी अपील कर दी। जिस पर प्रोटेक्शन अधिकारी और स्थानीय पुलिस की टीम को भेजा गया, जो ताला तोड़ उसे घर में बिठाकर आए। इसके बाद भी महिला को परेशान किया गया तो महिला ने फिर से अपील की, जिसके बाद कुछ समय तक उसे सुरक्षा भी दी गई।
जब दिल्ली पुलिस ने नहीं माने थे आदेश तो यहां से भेजी थी पुलिस
केस 2
एक महिला के पति की मौत के बाद उसके ससुराल वालों ने उस पर दूसरी शादी का दबाव बनाना शुरू कर दिया। जब वो महिला दूसरी शादी के लिए तैयार नहीं हुई, तो उसके दो बच्चों को ससुराल वालों ने अपने पास रख उस महिला को घर से निकाल दिया। महिला पांचवीं पास है, उसे कानून का ज्ञान नहीं था। वह 4 साल तक मायके में ही बच्चों से दूर रही। महिला ससुराल में रहने और बच्चों से मिलने तक की आस छोड़ चुकी थी। जब उसे इस कानून की जानकारी मिली तो उसने इसके लिए कोर्ट में अपील की। कोर्ट ने महिला को उसका हक दिलाया और अब महिला खुशी से अपने सुसराल में रह रही है।
पति की मौत के बाद निकाला, कोर्ट से हक लेकर वापस आई
ये हैं अधिकार
महिला सुरक्षा एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी गुप्ता ने बताया कि घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 में महिलाओं को काफी अधिकार मिले हंै। उन्हें जागरूक होने की जरूरत है।
पीड़ित महिला को अपने ससुराल में पति के घर में रहने का हक है। पीड़ित महिला अपनी सुरक्षा के लिए पुलिस अधिकारी, सेवा प्रदाता, आश्रय-गृह और चिकित्सकीय सहायता की मांग कर सकती है।
महिला भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए के तहत भी वैवाहिक क्रूरता के खिलाफ मामला दर्ज करवा सकती है। कोर्ट पीड़ित महिला को वित्तीय मदद का भी आदेश देती है। वित्तीय मदद न केवल महिला बल्कि उसके बच्चों को भी दी जाती है। महिला कोर्ट से बच्चों की कस्टडी भी ले सकती है

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