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Haryana

AMIT SHAH TO VISIT JIND WHERE 10 माह में पानी के 251 सैंपल फेल 24 गांवों का पानी पीने लायक नहीं

February 04, 2018 06:43 AM

COURSTEY  DAINIK BHASKAR  FEB 4
10 माह में पानी के 251 सैंपल फेल 24 गांवों का पानी पीने लायक नहीं

जिले में लगातार खराब हो रहा भू-जल, गांव से लेकर शहर तक बढ़ी लोगों की परेशानी

सुरेंद्र भारद्वाज | जींद

जिले में लगातार पेयजल संकट बढ़ता जा रहा है। इसका बड़ा कारण लगातार भूमिगत जल का खराब होना है। जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा पिछले 10 माह में जिले के विभिन्न गांवों से लिए गए पेयजल सैंपल की जांच में सामने आया है कि जींद डिवीजन के 24 गांवों का पानी अब लोगों के पीने लायक नहीं रहा। 1 अप्रैल 2017 से लेकर 31 जनवरी 2018 तक जनस्वास्थ्य विभाग ने विभिन्न जगहों से पेयजल के कुल 1847 सैंपल लिए। इनमें 1596 सैंपल पास हुए और 251 सैंपल फेल हो गए। जो सैंपल फेल हुए वे उन गांवों के भूमिगत जल के थे। जहां ग्रामीणों द्वारा इन दिनों उस भूमिगत जल को पेयजल में प्रयोग में लाया जा रहा है। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में इन गांवों में ग्रामीणों को पेयजल के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। इससे पहले ही जिले के 100 से ज्यादा गांव ऐसे हैं जहां का भूमिगत जल पीने योग्य नहीं हैं। ग्रामीण पेयजल के लिए वाटर वर्क्स सप्लाई पर निर्भर हैं या फिर उन्हें हर रोज कई किलोमीटर दूर खेतों से पानी लाना पड़ता है।
जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा पेयजल के लिए गए सैंपल व प्रयोगशाला जांच के बाद हुआ खुलासा
इन गांवों का जल पीने लायक नहीं
जिले के जिन गांवों के पिछले दिनों में पेयजल के सैंपल लिए गए उनमें 24 गांवों का भूमिगत जल पीने लायक नहीं मिला। इन गांवों में बरसाना, बोहतवाला, हैबतपुर, ईंटल खुर्द, कैरखेड़ी, खेड़ी तलौडा, खोखरी, लोहचब, निर्जन, तलौडा, आलन जोगीखेड़ा, ऐंचरा कलां, अंटा, बागड़ूकलां, बागड़ूखुर्द, बूढ़ाखेड़ा, हाडवा, कारखाना, खेड़ा खेमावती, निम्नाबाद, पिल्लूखेड़ा, रामपुरा, रोहड, व सिवाहा गांव शामिल हैं।
दिक्कत : पानी में बढ़ रहा फ्लोराइड का स्तर
जिले के जिन गांवों के भूमिगत जल के सैंपल फेल हुए हैं। उनमें फ्लोराइड का स्तर काफी अधिक पाया गया। कई गांव ऐसे हैं जहां के भूमिगत जल में फ्लोराइड 6 पीपीएम तक पहुंच गया। पेयजल में फ्लोराइड का सामान्य स्तर 1.05 पीपीएम तक होता है। यदि इससे ज्यादा मात्रा में पेयजल में फ्लोराइड मिलता है तो वह सेहत के लिए हानिकारक है। जिले के कई गांव ऐसे हैं जहां के भूमिगत जल में फ्लोराइड का स्तर सामान्य से कुई गुणा अधिक पहुंच गया है। यह पेयजल लोगों के साथ पशुओं के लिए भी हानिकारक है।
हाडवा में भूमिगत पानी खराब होने पर खेतों से पानी ले जाते युवा।
असर : दांतों और हड्डी संबंधी बीमारियां बढ़ रहीं
जहां के भूमिगत जल में फ्लोराइड की मात्रा अधिक है और लोग उसे पीने में प्रयोग करते हैं तो फिर दांतों व हड्डी संबंधी बीमारियों को बढ़ावा मिलता है। सीएमओ डाॅ. संजय दहिया बताते हैं कि पेयजल में फ्लोराइड का स्तर बढ़ने से दांत पीले पड़ जाते हैं और खराब हो जाते हैं। दांतों संबंधी बीमारी बढ़ जाता है। इसी तरह से हड्डी कमजोर हो जाती हैं और जोड़ रोग संबंधी बीमारियों बढ़ जाती हैं। फ्रैक्चर भी इस दौरान जल्द होता है।
समाधान : विभाग लगाएगा अब गहरे ट्यूबवेल
जिन गांवों में भूमिगत जल में फ्लोराइड की मात्रा अधिक पाई गई है। उन गांवों में जनस्वास्थ्य विभाग अब 1300 से 1400 फीट की गहराई पर ट्यूबवेल लगाकर ग्रामीणों को पेयजल सप्लाई मुहैया करवाएगा। जिन 24 गांंवों के भूमिगत जल के सैंपल फेल हुए हैं। उन सभी में विभाग ने गहरे ट्यूबवेल लगाने का फैसला लिया है। इसके लिए विभाग द्वारा प्रपोजल तैयार किए जा रहे हैं। उम्मीद है जल्द ही संबंधित गांवों में गहरे ट्यूबवेल लग जाएंगे।
समाधान की बनाई योजना
अप्रैल से लेकर जनवरी तक विभाग द्वारा लिए गए सैंपल में से 251 सैंपल फेल हुए हैं। जो सैंपल फेल हुए हैं वे अधिकतर उन गांवों के हैं जहां ग्रामीणों द्वारा भूमिगत जल पेयजल के रूप में प्रयोग में लाया जाता है। इस पर विभाग ने इन संबंधित 24 गांवों में गहराई पर ट्यूबवेल लगाकर ग्रामीणों को पेयजल सप्लाई मुहैया करवाने की योजना बनाई है।' - संजय शर्मा, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग

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