Thursday, November 15, 2018
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Haryana

भिवानी की बेटी विभा ने ब्रेस्ट कैंसर की दवा इजाद की

September 07, 2017 12:05 PM

भिवानी:हरियाणा की छोटी कांशी भिवानी की वैज्ञानिक बेटी डाक्टर विभा भारद्वाज ने कैंसर की एक ऐसी दवा की खोज की है, जिससे कैंसर को जड़ से खत्म किया जा सकता है। उन्होने गुदादार फल और सब्जियों के कचरे से सिल्वर और गोल्ड पार्टिकल बनाए है। इन पार्टिकल से किए गए अनुसंधान में उन्होने पूरी सफलता मिली है। मीडिया से एक विशेष बातचीत में बताया कि अभी उन्होने इनका ब्रेस्ट कैंसर पर प्रयोग किया है। जिसमें वे शत प्रतिशत कामयाब हुई हैं। उन्होने बताया कि प्रारम्भिक स्तर पर सफलता के बाद अब वो बड़े स्तर पर इसका प्रयोग करेगी और फिर मानव परीक्षण होगा। उन्होने बताया कि भारत में प्रदुषित पानी से 70 से 80 प्रतिशत महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर होता है। यह भारत में आज सबसे बड़ी समस्या है। उनका सपना है कि भारत से शतप्रतिशत कैंसर को खत्म कर दिया जाए और ऐसा सम्भव भी है। उन्होने कहा कि अगर भारत सरकार इसमें उनका सहयोग करें तो वो अपनी दवा बाजार में ला सकती है। परन्तु अपने देश में ऐसे अनुसंधान राजनीति का शिकार हो जाते हैं। दसके लिए उन्होने अपने पिछले अनुभव बताए। इसी कारण उन्होने केंद्र सरकार की तीन नौकरियोंको छोड़ विदेश में काम करने का निर्णय लिया। इन दिनो वह आईसीजीईबी अर्जटिना में सीनियर वैज्ञानिक के रूप में काम कर रही हैं। उन्होने बताया कि यमुना शुद्धिकरण पर इन्डो-जापान परियोजना विश्च प्रसिद्ध जापानी वैज्ञानिक हिदेशी हर्डा की देखरेख में शुरू हुुई थी। परन्तु यह महत्वपूर्ण परियोजना राजनीति का शिकार हो गई। डाक्टर विभा ने दावा किया है कि अगर सरकार उसको सहयोग कर पूरे संसाधन मुहैया करवाती है तो वो दो साल में गंगा को शुद्ध कर सकती है। इसके लिए उसके पास पूरा प्रोजक्ट और मैप है। एक सवाल के जवाब में उन्होने कहा कि इस महत्वपूर्ण परियोजना के बारे में उन्होने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 2014 में एक पत्र भी लिखा था। परन्तु उस पत्र का मेल से आए जवाब से वह निराश हो गई। प्रधानमंत्री कार्यालय से आई मेल में उससे प्रोजक्ट की तकनीक बारे विस्तार से जानकारी मांगी गई। लेकिन ऐसा कोई भी नहीं कर सकता है। उन्होने दावा किया है कि उसके पास ऐसे फार्मूला है, जो उन्होने खुद तैयार किए हैं। परन्तु भारत का यह दुर्भाज्य है कि यंहा प्रतिभाओं को सम्मान और सरकार का सहयोग नहीं मिलता। इसीलिए प्रतिभाएं पलायन कर रही हैं। विदेश में काम और व्यक्ति की कद्र की जाती है। उन्होने सरकार से अपील की भी है कि वें प्रतिभाओं का पलायन रोके अन्यथा भारत प्रतिभा प्रदुषण देश बन जायेगा। डाक्टर विभा का कहना है कि अगर भारत में कचरे को ही बदला जाए तो उससे पर्याप्त मात्रा में बिजली, पानी, जैविक खाद आदि तैयार की जा सकती है। उन्होने बताया कि वें कचरे से बायोफयूल पर काम कर रही हैं।

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