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यमुनानगर जिला प्रशासन संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है ताकि वर्षा ऋतु के दौरान किसी भी क्षेत्र में संभावित बाढ़ जैसी स्थिति से सही ढंग से निपटा जा सके

September 01, 2017 04:23 PM

यमुनानगर जिला प्रशासन संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है ताकि वर्षा ऋतु के दौरान किसी भी क्षेत्र में संभावित बाढ़ जैसी स्थिति से सही ढंग से निपटा जा सके। जिला प्रशासन ने किसानों व मजदूरों समेत सभी जिलावासियों से अपील करते हुए कहा कि वे स्वयं या अपने परिवार के सदस्यों, विशेषकर बच्चों को नदियों, नहरों, नालों व तालाबों की ओर न जाने दें, क्योंकि बरसात के मौसम में नदियों, नहरों, नालों व तालाबों का जलस्तर बढ़ जाता है व कोई भी अनहोनी हो सकती है। बरसात के मौसम के दौरान नदियों के बीच टापू में स्थित खेतों एवं डेरों में जाने की लिए भी सावधानी बरतें।
    जिला यमुनानगर के उपायुक्त रोहतास सिंह खर्ब ने आज यहां यह जानकारी देते हुए बताया कि बरसात के मौसम में जिले के पहाड़ी क्षेत्रों, पड़ोसी राज्यों हिमाचल प्रदेश व उत्तराखण्ड आदि के पहाड़ी कैंचमैंट एरिया में अचानक अधिक वर्षा होने के कारण जिले में सम्भावित बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिये सभी प्रकार की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और जिले में स्थिति पर दिन-रात नजर रखने के लिए जिला सचिवालय में जिला स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई है। इस बाढ़ नियंत्रण कक्ष में लगे टेलीफोन नम्बर 01732-237801 पर किसी भी समय सम्भावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के बारे में सूचना देकर सहायता प्राप्त कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त सब-डिवीजन स्तर पर जगाधरी, बिलासपुर व रादौर, तहसील कार्यालय छछरौली तथा जल सेवाएं मण्डल जगाधरी के कार्यालय व हथनी कुंड बैराज में भी बाढ़ नियंत्रण कक्षों की स्थापना की गई है। 
    उपायुक्त ने बताया कि जिला स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष में 24 घण्टे विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, जो अलग-अलग शिफ्टों में ड्यूटी पर तैनात हंै। उन्होंने बताया कि बाढ़ नियंत्रण कक्षों में तैनात अधिकारी एवं कर्मचारी नदियों के जल स्तर में अचानक वृद्धि होने से किसी क्षेत्र में सम्भावित बाढ़ जैसी स्थिति की जानकारी जिले के उच्च अधिकारियों को तुरंत देंगे। इसके अतिरिक्त जिले के विभिन्न विकास खण्डों के गांवों में भी ग्रामीण बाढ़ नियंत्रण कक्षों की स्थापना की गई है। 
    श्री खर्ब ने बताया कि सब-डिवीजन कार्यालय रादौर में स्थापित बाढ़ नियंत्रण कक्ष का इंचार्ज एसडीएम कार्यालय के अधीक्षक को बनाया गया है। इस बाढ़ नियंत्रण कक्ष का टेलीफोन नम्बर 01732-283412 है। सब डिवीजन कार्यालय बिलासपुर में स्थापित बाढ़ नियंत्रण कक्ष का इंचार्ज एस.डी.एम. कार्यालय के अधीक्षक को बनाया गया हैं। इस बाढ़ नियंत्रण कक्ष का टेलीफोन नम्बर 01735-274890 है। छछरौली के तहसील कार्यालय में तहसीलदार को बाढ़ नियंत्रण कक्ष का इंचार्ज बनाया गया है और इस बाढ़ नियंत्रण कक्ष का दूरभाष नम्बर 01735-277339 है। इसी प्रकार, जगाधरी में सब-डिवीजन स्तर का बाढ़ नियंत्रण कक्ष बनाया गया है जिसके इंचार्ज एसडीएम कार्यालय के अधीक्षक हंै। इस बाढ़ नियत्रण कक्ष का दूरभाष नम्बर 01732-237805 है। 
    उपायुक्त रोहतास सिंह खर्ब ने बताया कि नहर कालोनी में स्थित कार्यकारी अभियंता जल सेवाएं मण्डल जगाधरी के कार्यालय में भी बाढ़ नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई है, जिसका टेलीफोन नम्बर 01732-237837 है। इसके अतिरिक्त, ताजेवाला के नजदीक हथनी कुंड बैराज पर भी बाढ़ चेतावनी कक्ष बनाया गया है। इन बाढ़ चेतावनी कक्षों मेें नदियों में बढ़ रहे जल स्तर की मात्रा की पूरी जानकारी है और जिला के अधिकारियों को जल स्तर की मात्रा की समय-समय पर पूरी जानकारी दी जाती है। उन्होंने बताया कि मानसून के मौसम में अधिक वर्षा होने के कारण जिले के किसी भी हिस्से में सम्भावित बाढ़ जैसी स्थिति के दौरान बाढ़ राहत कार्यो में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता के लिए सम्बन्धित विभाग के अधिकारी स्वयं जिम्मेदार होंगे। 
उन्होंने सभी विभागों के अधिकारियों को यह निर्देश दिए कि बरसात के मौसम में बिना अनुमति के अपना मुख्यालय न छोड़ें और अपने मोबाइल फोन हमेशा चालू हालत में रखें। इसके अलावा, अपने अधीनस्थ अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भी सतर्क रखें। उन्होंने बताया कि संभावित बाढ़ ग्रस्त इलाकों में सम्बंिधत तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों व खण्ड विकास एवं पंचायत अधिकारियों की देख-रेख में पटवारियों, ग्राम सचिवों, नम्बरदारों व चौकीदारों की टीमें बना दी गई हैं जो बाढ़ के समय लोगों को जागरूक कर उनकी सहायता करंेगी। उन्होंने बताया कि बाढ़ आने पर या पूर्व सूचना मिलने पर सभी सम्बङ्क्षधत अधिकारियों को मोबाइल के द्वारा भी संदेश दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि सभी तहसीलों में बाढ़ राहत उपकरण उपलब्ध हंै और बाढ़ पीडि़त व्यक्तियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए जगहों का चयन कर लिया गया है। इसके अतिरिक्त, सेना व एनडीआरएफ भी सम्पर्क में हंै ताकि आवश्यकता पडऩे पर उनसे सहायता ली जा सके।

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