Wednesday, October 24, 2018
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Haryana

हरियाणा के मुख्यमंत्री, हरियाणा के राज्यपाल एवं झज्जर के उपायुक्त को पत्र लिखकर शहीद हवा सिंह लांबा के नाम पर मार्ग और स्कूल का नाम रखने की मांग

August 21, 2017 02:09 PM

हरियाणा : झज्जर जिलामुख्यालय के अंतिम छौर पर बसे वीरों की देवभूमि कहे जाने वाले गांव धरौली की सामाजिक संस्था मां-मातृभूमि सेवा समिति के अध्यक्ष युद्धवीर सिंह लांबा ने हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर, हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी एवं झज्जर के उपायुक्त को पत्र लिखकर अमर शहीद हवा सिंह लांबा के नाम पर मार्ग और स्कूल का नाम रखने की मांग की है।

अब तक 8 बार रक्तदान कर चुके सामाजिक कार्यकर्ता युद्धवीर सिंह लांबा, अध्यक्ष, मां-मातृभूमि सेवा समिति ने हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर, हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी एवं झज्जर के उपायुक्त को लिखे पत्र में कहा है कि धारौली के राजकीय माध्यमिक विद्यालय का नाम शहीद हवा सिंह लांबा के नाम पर शहीद हवा सिंह लांबा राजकीय माध्यमिक विद्यालय रखा जाए । धारौली से तुम्बाहेडी,झज्जर सड़क (कुल लम्बाई लगभग 2 किलोमीटर ) का नाम शहीद के नाम पर शहीद हवा सिंह लांबा मार्ग रखा जाए । धारौली से अम्बोली,झज्जर (कुल लम्बाई लगभग 2 किलोमीटर ) सड़क का नाम शहीद के नाम पर शहीद हवा सिंह लांबा मार्ग रखा जाए । धारौली गांव के मध्य से गुजर रहे कोसली-धारौली-सुबाना-झज्जर मार्ग पर गुड़ियानी मोड/ चौक का नाम शहीद के नाम पर शहीद हवा सिंह लांबा चौक रखा जाए । इस सड़क पर गुजरने वाले लोग इस वीर जवान (शहीद हवा सिंह लांबा ) की कुर्बानी को सदा याद रखेंगे । धारौली के राजकीय माध्यमिक विद्यालय का नाम शहीद के नाम पर शहीद हवा सिंह लांबा राजकीय माध्यमिक विद्यालय रखवाने का उद्देश्य बच्चों के मन में देशभक्ति की भावना जागृत करना है ताकि वे भविष्य में अच्छे नागरिक बनकर देश की सेवा कर सके ।

आपको बता दें कि शहीद हवा सिंह लांबा सुपुत्र स्वर्गीय श्री श्योचन्द, गांव व डाकघर धारोली, झज्जर, हरियाणा, भारतीय सेना की 4 ग्रेनेडियर में एक सिपाही (लांस नायक) थे जिनका सेना क्रमांक 2640752 था जिन्होंने 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान अद्भुत वीरता का प्रदर्शन करते 6 सितंबर 1965 में दुश्मनों से लड़ते हुए देश पर अपने प्राण न्यौछावर कर दिये थे और शहीदों में अपना नाम अमर किया। शहीद हवा सिंह लांबा की आदरणीय मां का नाम श्रीमती जमुना देवी व उनकी पत्नी का नाम श्रीमती किताबों देवी था । 1963 में शहीद हवा सिंह लांबा के घर एक बेटी संतोष का जन्म हुआ ।

भारत की एकता और अखंडता पर प्राण न्यौछावर करने वाले भारत माँ के वीर सपूत शहीद हवा सिंह लांबा का नाम कोसली में शहीद यादगार स्मारक में संगमरमर पत्थर में भी लिखा हुआ हैं ।

गौरतलब है कि 1965 भारत-पाकिस्तान युद्ध में देश की आन बान और शान के लिए 6 सितंबर 1965 में अपनी जिंदगी कुर्बान करने वाले धारोली के शहीद हवा सिंह लांबा के सम्मान में धारोली में अब तक उनकी शहीद यादगार स्मारक व प्रतिमा की स्थापना नहीं हो पाई ।

युद्धवीर सिंह लांबा ने पत्र में लिखा है कि सैनिक ही राष्ट्र का सच्चा रक्षक है, सैनिकों की शहादत के कारण ही आज ये देश सुरक्षित है, सैनिक का कोई धर्म, जाति नहीं होती है, उसकी पहचान सिर्फ भारत के राष्ट्र प्रहरी के तौर पर होती है। भारतीय सैनिक अपने नागरिकों की रक्षा के लिए शहादत देते हैं। सरकार को भी देश की रक्षा की खातिर अपने जान देने वाले वीर सपूतों के महत्व को महसूस करना चाहिए। इस पत्र में युद्धवीर सिंह लांबा ने लिखा है कि देश के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले शहीद हवा सिंह लांबा को सच्ची श्रद्धांजलि देने कि लिए निवेदन है कि मार्ग और स्कूल का नाम शहीद हवा सिंह लांबा के नाम पर रखा जाए।

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