हरियाणा

हाईकोर्ट ने तलब किया ग्वाल पहाड़ी का राजस्व रिकाॅर्ड-आईएसएस अधिकारी मलिक, हरबख्श सिंह हैं आरोपों के केंद्र में

April 21, 2017 06:04 AM

COURSTEY DAINIK TRIBUNE APRIL21

हाईकोर्ट ने तलब किया ग्वाल पहाड़ी का राजस्व रिकाॅर्ड
tगुरुग्राम, 20 अप्रैल (हप्र)
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने विवादित ग्वाल पहाड़ी गांव का राजस्व रिकाॅर्ड तलब किया है। इस रिकार्ड की जांच करने के बाद हाईकोर्ट तय करेगा कि मामले की जांच सीबीआई से करवाई जाए या किसी दूसरी एजेंसी से। हाईकोर्ट की डबल बैंच ने प्रदेश के डिप्टी अटॉर्नी जनरल (डीएजी) एसएस पन्नू को इन आदेशों को तामील करवाने के लिए आदेश की प्रति उन्हें दी है। 465 एकड़ जमीन का यह विवाद तीन हजार करोड़ से अधिक का घोटाला बताया जाता है। मामले की सुनवाई 4 मई को होगी।
गुरुग्राम निवासी हरिंद्र सिंह धींगड़ा ने एडवोकेट करणवीर सिंह खेहर के माध्यम से पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ग्वाल पहाड़ी के जमीन घोटाले की जांच सीबीआई से करवाने की मांग की थी। इस मामले में हरियाणा सरकार की ओर से पेश हुए डिप्टी अटॉर्नी जनरल (डीएजी) एसएस पन्नू ने अदालत को बताया कि सरकार पूरे मामले के प्रति गंभीर है और इसकी जांच अपनी किसी एजेंसी से करवाने की तैयारी कर रही है। लेकिन याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि इस पूरे विवाद में एसईजेड भी शामिल है और एसईजेड की परमिशन देने का कार्य केंद्र सरकार की ओर से किया जाता है। इसलिए प्रदेश की कोई भी एजेंसी केंद्रीय स्तर के इस मामले की जांच करने में सक्षम नहीं है। ऐसे में सरकार का प्रदेश की किसी एजेंसी से जांच करवाने का तर्क जायज नहीं है।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस एसएस सौरो और जस्टिस दर्शन सिंह की ज्वाइंट बैंच ने 20 अप्रैल को ग्वाल पहाड़ी का सारा राजस्व रिकाॅर्ड तलब कर लिया। रिकाॅर्ड के साथ तहसीलदार, नायब तहसीलदार, पटवरी और कानूनगो को भी हाजिर रहने के लिए कहा गया है। इसमें विशेष रूप से मुटेशन नंबर 610 तथा 611 से संबंधित सभी जमाबंदियां भी मांगी गई हैं।
याचिकाकर्ता हरिंद्र सिंह धींगड़ा का आरोप है कि जमीन घोटाले को लेकर अब तक सरकारों और नेताओं की मंशा साफ नहीं रही। नेता अपने फायदे के लिए ग्वाल पहाड़ी का मामला उठाते हैं और फिर शांत हो जाते हैं। इसलिए इस मामले की गहराई तक जाना जरूरी है।
आईएसएस अधिकारी मलिक, हरबख्श सिंह हैं आरोपों के केंद्र में
याचिका में आईएसएस अधिकारी वाईएस मलिक व हरबख्श सिंह के फैसले को पूरे विवाद की जड़ बताया गया है। 3717 जमीन को 1989 में हरबख्श सिंह ने मुस्तरका मालिकान से निजी मलकियत में बदलने का आदेश जारी किया था। इस फैसले को 1990 में अदालत ने पलट दिया लेकिन इसका राजस्व विभाग ने इसका रिकाॅर्ड कागजों में दर्ज नहीं किया। वर्ष 2010 में नगर निगम के अधीन आने के बाद यह मामला फिर सामने आया तो हाईकोर्ट ने डीसी पूरे मामले में फैसला लेने का अधिकार दे दिया। तत्कालीन डीसी शेखर विद्यार्थी ने फैसला पंचायत के पक्ष में सुनाया लेकिन वाईएस मलिक ने डीसी के फैसले को पलटते हुए मलकियत निजी रखने का फरमान जारी कर दिया। इसके बाद से यह मामला विवादों में उलझा हुआ

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