हरियाणा

यमुनानगर में सरस्वती की खुदाई, पिहोवा में सरोवर सूखा सरस्वती सरोवर में पितरों के पिंडदान करने के लिए पानी नहीं

April 21, 2017 05:54 AM

COURSTEY NAV  BHARAT TIMES APRIL21

यमुनानगर में सरस्वती की खुदाई, पिहोवा में सरोवर सूखा
सरस्वती सरोवर में पितरों के पिंडदान करने के लिए पानी नहीं
सरस्वती के दो रूप: करोड़ों खर्च कर खुदाई करा रही सरकार पिहोवा के सूखे सरोवर पर चुप•एस.पी.रावत, कुरुक्षेत्र : पौराणिक नदी सरस्वती के अस्तित्व को ढूंढने के लिए हरियाणा सरकार हजारों करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। दावा है कि सरस्वती को धरा पर लाकर ही रहेंगे, लेकिन सचाई इसके उलट है।

एक ओर जहां बुधवार से यमुनानगर में पिछले 6 महीने से बंद खुदाई का काम शुरू हो गया वहीं, कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक तीर्थ सरस्वती सरोवर में एक बूंद पानी नहीं है। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि सरस्वती सरोवर सूखा पड़ा है। मान्यता के अनुसार, यमुनानगर के आदिबद्री से निकलने वाली सरस्वती नदी कुरुक्षेत्र और कैथल होते हुए आगे जाती है। आज की तारीख में जहां यमुनानगर में खुदाई के सकारात्मक नतीजों के दावे किए जा रहे हैं वहीं, पितरों के नियमित पिंडदान के लिए प्रसिद्ध सरस्वती सरोवर में पानी को तरस रहा है। सरस्वती नदी के ये दो रूप सरकार के दावों की पोल खोलते हैं।

जल तर्पण नहीं कर सकते

पौराणिक मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने परिवार सहित युद्ध में मारे गए अपने सभी पूर्वजों का श्राध तर्पण सरस्वती सरोवर में ही किया था। यही वजह है कि पिहोवा स्थित पृथूदक तीर्थ सरस्वती सरोवर में देशभर से पिंडदान और श्राध तर्पण के लिए लोग पहुंचते हैं। पृथूदक तीर्थ के वरिष्ठ व बुजुर्ग पुरोहित डा. राजेंद्र शर्मा का कहना है कि रोजाना आने वाले और खासतौर पर अमावस्या पर देश-विदेश से कर्मकांड के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की शिकायतें उनसे सुनी नहीं जाती।

भाखड़ा नहर से जोड़ा गया, करोड़ों खर्च

हैरानी की बात यह है कि पृथूदक तीर्थ सरस्वती सरोवर में भाखड़ा नहर से बहती जलधारा और लगाए गए वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट पर करोड़ों रुपया खर्च हो चुका है। डॉ. राजेंद्र शर्मा का कहना है कि उन्होंने अपनी जिंदगी में पृथूदक तीर्थ सरस्वती सरोवर की इतनी दयनीय हालत कभी नहीं देखी। सूखे सरस्वती सरोवर में केवल गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। पृथूदक तीर्थ सरस्वती सरोवर में पानी नहीं होने व सूखा होने पर अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।

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