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पंजाब समाचार

PUNJAB-रोडवेज को नौ वर्षो में लगी 370 करोड़ की चपत

April 19, 2017 06:07 AM

COURSTEY DAINIK JAGRAN APRIL19

अमीरों को फायदा, गरीबों की जेब काटी 1पंजाब सरकार ने 16 दिसंबर 2016 को नया नोटीफिकेशन जारी कर ऑर्डिनरी बसों का रोड टैक्स 2.75 रुपये प्रति किलोमीटर, एसी बसों का 1.62 रुपये प्रति किलोमीटर निर्धारित कर दिया। रोडवेज मुलाजिमों की साझा एक्शन कमेटी के कन्वीनर सुरिंदर सिंह का आरोप है कि बादल सरकार ने निजी फायदे के लिए रोडवेज को खत्म करने का काम किया है। पूर्व ट्रांसपोर्ट डायरेक्टर मनदीप सिंह तो सिर्फ मोहरे हैं। कैप्टन सरकार को इस पूरे घोटाले की जांच सीबीआइ से करानी चाहिए, ताकि अरबों के इस घोटाले के असली सूत्रधारों को पकड़ा जा सके।1
बदली नीति से निजी बस ऑपरेटरों को फायदा नहीं1सरकार फायदे के आधार पर काम नहीं करती। उसकी कोशिश जनता को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं देने की होती है, बदली नीति से निजी बस ऑपरेटरों को फायदा नहीं मिला वे भी रो रहे हैं।1-अजीत सिंह कोहाड़, पूर्व ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर11हम तो सरकार के आदेश पर काम करते हैं, नीतियां तो सरकार बनाती है। रोड टैक्स कम करने पर रोडवेज की बसें चलतीं, तो एसी बसों का लाभ रोडवेज को मिलता, लेकिन निजी ऑपरेटरों ने एसी बसें लाकर वो लाभ खुद ले लिया।1-हरचरण सिंह, सुपरिंटेंडेंट पॉलिसी, पंजाब रोडवेज, चंडीगढ़
अधिकारियों की मिलीभगत से हळ्आ ये सारा काम : मास्टर मोहन लाल1तत्कालीन परिवहन मंत्री मास्टर मोहनलाल का कहना है कि नई नीति रोडवेज को उस समय 262 करोड़ रुपये के घाटे से उबारने के लिए बनाई गई थी। इसका फायदा सरकारी बसों को मिलना था। मैंने घाटा कम करके 50 करोड़ रुपये तक ला दिया था, लेकिन रोडवेज के अधिकारियों ने मिलकर इसका फायदा एक परिवार को पहुंचाया। इसमें किसी भी स्तर पर जांच करा ली जाए, वह इसके लिए तैयार हैं। गड़बड़ी उन्होंने या भाजपा ने नहीं की है।1
2007 में था 1800 बसों का फ्लीट12007 में रोडवेज बसों के बेड़े में पीआरटीसी को शामिल कर 1800 बसों का फ्लीट था। निजी बसों का परमिट लगभग 4000 हजार बसों का था, लेकिन सड़क पर लगभग 6000 बसें दौड़ रही थीं। एसी बस उस समय सिर्फ चंडीगढ़ डिपो में थीं। वर्तमान में रोडवेज बसों का आंकड़ा लगभग वही है, निजी आपरेटरों की एसी बसें 500 से ज्यादा चल रही हैं। 73 इंटीगेट्रिड कोच हैं, वह भी निजी बसों की हैं। निजी बसों की संख्या लगभग पांच हजार के करीब पहुंच गई है, जबकि बिना परमिट वाली बसों का आंकड़ा बढ़ा है।

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