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CHANDIGARH-कैमलॉट प्रोजेक्ट पर रोक से सूखने से बच जाएगी सुखना असर अब नयागांव में गिरेंगी प्रॉपर्टी की कीमतें

April 14, 2017 06:47 AM

COURSTEY DAINIK JAGRAN APRIL14
कैमलॉट प्रोजेक्ट पर रोक से सूखने से बच जाएगी सुखना
असर
अब नयागांव में गिरेंगी प्रॉपर्टी की कीमतें

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : टाटा कैमलॉट प्रोजेक्ट पर रोक के बाद यूटी प्रशासन ने राहत की सांस ली है। प्रशासन सुखना कैचमेंट एरिया को बचाने के लिए लगातार पंजाब और हरियाणा को चिट्ठी लिखता रहा है। उसके बाद भी अतिक्रमण बढ़ता ही जा रहा है। इस फैसले का हवाला देते हुए अब चंडीगढ़ प्रशासन दोनों प्रदेशों को फिर से चिट्ठी लिखेगा। मनसा देवी कांप्लेक्स का निर्माण भी कैचमेंट एरिया में ही हुआ है। इस पर सवाल उठते रहे हैं। टाटा कैमलॉट का प्रोजेक्ट मुल्लांपुर का अहम प्रोजेक्ट था। कांसल गांव के लोग और अन्य बिल्र्डस इस प्रोजेक्ट का हवाला देते हुए अपने कंस्ट्रक्शन वर्क की मंजूरी के लिए भी दबाव बनाते रहे हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले से इन अटकलों पर विराम लगेगा।1अतिक्रमण सुखना के लिए ग्रहण : कैचमेंट एरिया में बढ़ता अतिक्रमण सुखना लेक के लिए ग्रहण है। शिवालिक की पहाड़ियों से मिलने वाला पानी ही सुखना के लिए जल का मुख्य स्त्रोत है। जितना अतिक्रमण पहाड़ों और सुखना लेक के बीच में हो रहा है उतना ही कम पानी सुखना को मिल रहा है। अतिक्रमण की वजह से पानी सुखना को न मिलकर दूसरे चौ में चला जाता है।1वाइल्ड लाइफ को ध्यान में रखते हुए ढाई किलोमीटर का इको सेंसटिव जॉन निर्धारित किया गया है। इस एरिया में किसी भी तरह के कंस्ट्रक्शन पर रोक है। कंस्ट्रक्शन सीधे-सीधे वन्य जीवन को प्रभावित करती है। वाइल्ड लाइफ एरिया कम होने से ही वन्य जीव रिहाइशी एरिया तक पहुंच जाते हैं।चंडीगढ़ भूकंप की दृष्टि से जोन चार में है। इसके आसपास बड़ी बिल्डिंग बनाने पर सरकार को सतर्कता बरतनी चाहिए। हो सके तो ऊंची बिल्डिंग बनाने से बचना चाहिए। चंडीगढ़ के बीचों बीच से फाल्ट लाइन गुजरती है। बिल्डिंगों को सेफ करने की जरूरत है। जिस तरह से इमारतें बन रही हैं और सोसायटियां बस रही हैं उन पर भी रोक लगनी चाहिए। पिंजौर और कालका के साथ घग्गर बैल्ट और सुखना कैचमेंट के एरिया में निर्माण पर रोक लगा देनी चाहिए। टाटा कैमलॉट जैसा प्रोजेक्ट और वो भी सुखना कैचमेंट एरिया में तबाही का कारण बन सकता है। 1- एडी आहलुवालिया, पीयू जियोलॉजी विभाग के पूर्व प्रोफेसरचंडीगढ़ के नजदीक नया गांव में टाटा कैमलॉट हाउसिंग प्रोजेक्ट की जमीन ।जागरण संवाददाता, मोहाली : नयागांव के साथ सटे कांसल में बनने वाले बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट टाटा कैमलॉट पर दिल्ली हाईकोर्ट की रोक के बाद अब क्षेत्र में प्रॉपर्टी की कीमतें गिर सकती हैं। हालांकि कांसल और आसपास के क्षेत्रों में पंजाब के कई ब्यरोक्रेट्स और आइपीएस अफसरों के फॉर्म हाउस व कोठियां हैं। नयागांव के लोगों का कहना है कि यहां पर अब प्रॉपर्टी की कीमतें कम होंगी, वहीं क्षेत्र के विकास पर भी पड़ सकता है। टाटा कैमलॉट प्रोजेक्ट के बाद उम्मीद लगी थी कि जहां पर विकास तेजी से होगा। क्योंकि इस प्रोजेक्ट में पंजाब के कई नेताओं व अफसरों का पैसा लगा हुआ था। 1नयागांव और कांसल में प्रॉपर्टी का काम करने वाले हरजिंदर सिंह बिल्ला ने कहा कि अभी तक उक्त क्षेत्र में लोग इसलिए निवेश कर रहे थे क्योंकि उन को उम्मीद थी कि टाटा कैमलॉट प्रोजेक्ट को कभी न कभी हरी झंडी मिल जाएगी। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद एकाएक लोग अपनी प्रॉपर्टी बेचेंगे, जिन्होंने सिर्फ निवेश के लिए प्रोजेक्ट के आसपास जगह ले रखी थी।1वहीं, राजिंदर सिंह ने कहा कि यह प्रोजेक्ट फिलहाल कागजों में ही थी। शुरू से विवादों में आने के चलते इससे प्रॉपर्टी पर कोई खासा नहीं पड़ने वाला, लेकिन विकास पर जरूर पड़ सकता है। नयागांव में हाल ही में पंजाब के केबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने भी पहुंचे और वह इलाके की समस्याएं देखकर हैरान हो गए। अभी तक उनके निर्देशों के बाद भी कुछ खास काम नहीं हुआ है।1ध्यान रहे कि टाटा कैमलॉट प्रोजेक्ट को लेकर 2015 से दिल्ल्ी हाईकोर्ट में ऑर्डर रिजर्व पर थे, जिस पर बुधवार को फैसला सुनाया गया। इसमें कहा गया है कि जिस एरिया में यह प्रोजेक्ट बनाया जाना है, वह सुखना कैचमेंट एरिया का हिस्सा है। प्रोजेक्ट को लेकर जो भी अप्रूवल पंजाब सरकार द्वारा या नयागांव पंचायत की तरफ से दी गई हैं, उन्हें खारिज किया जाता है। इसमें करीब 28 मंजिला बिल्डिंग खड़ी की जानी थी।1हालांकि कुछ लोगों का यह भी कहना है कि दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का नया गांव के विकास पर कोई होगा या नहीं, इस बारे में अभी अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। इतना जरूर है कि जिन नेताओं और अफसरों को फ्लैट मिलने थे उन्हें इस फैसले से जरूर करारा झटका लगा है।’>>नयागांव के लोगों ने कहा, इलाके के विकास पर पड़ सकता है 1’>>कई करोड़ के इस प्रोजेक्ट पर दिल्ली हाईकोर्ट ने लगाई है रोक

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