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PUNJAB-मुख्यमंत्री जी, मेरी पेंशन जरूरत से ज्यादा है, दस हजार रुपए घटाई जाए

April 12, 2017 06:00 AM

COURSTEY DAINIK  BHASKAR APRIL12

मुख्यमंत्री जी, मेरी पेंशन जरूरत से ज्यादा है, दस हजार रुपए घटाई जाए
मनीष शर्मा | लुधियाना


जहांसरकारी अफसरों पर मोटी सेलरी मिलने के बाद भी रिश्वत लेने के आरोप लगते हों, वहीं पंजाब सरकार के नहरी महकमे से सेवामुक्त हुए एसडीओ राजिंदर पाल गोयल ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर पेंशन 10 हजार रुपये कम करने की मांग की है। मोहाली के सेक्टर 70 में रहने वाले राजिंदर पाल ने पहला पत्र पिछले साल 5 दिसंबर को सीएम के साथ वित्त मंत्री, नहरी महकमे के प्रमुख सचिव चीफ इंजीनियर को भेजा था। जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने 5 अप्रैल को फिर रिमाइंडर भेजा। उन्होंने लिखा, चार महीने बीतने पर भी उनकी विनती पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब उनके इस पत्र को वित्त मंत्री ऑफिस ने कार्रवाई के लिए आगे भेज दिया है।
भास्कर से बातचीत में राजिंदर गोयल ने कहा, वो 30 नवंबर 2001 को नहरी महकमे की वर्कशॉप डिवीजन से सेवामुक्त हुए थे। उन्हें 34 हजार पेंशन मिलती है। अब वे 73 साल के हो चुके हैं। उन्हें इतने पैसे की जरूरत नहीं। इसलिए सरकार को पेंशन दस हजार कम करने को कहा। उन्होंने कहा कि बेटा अशोक गोयल का प्रॉपर्टी डीलर का अच्छा कारोबार है। बेटी की शादी हो चुकी है। पत्नी दर्शन गोयल के साथ उनकी जिंदगी अच्छी गुजर रही है। वो अपना टाइम अब लोगों को डाइट चार्ट देने में बिताते हैं। जो बिल्कुल फ्री है और उनकी कोशिश है कि गलत खाने से लोग बीमार पड़ें। वहीं, सुनाम में उनकी सोसाइटी नेचर क्योर चेरिटेबल हॉस्पिटल भी चलाती है। जहां रियायती दरों पर लोगों का इलाज होता है। जहां आजकल हर कोई पैसे के पीछे भाग रहा है, ऐसे मौके पर वो पेंशन घटाने की गुजारिश कर रहे हैं, इस सवाल पर राजिंदर गोयल कहते हैं कि पैसे की कमी तो कभी पूरी नहीं हो सकती, इसलिए मैंने इच्छाएं ही घटा दी। धर्म ग्रंथों सत्संग से मुझे महसूस हुआ कि खुश रहने का सबसे बेहतर रास्ता त्याग ही है। आदमी मन को समझा ले तो शारीरिक सांसारिक जरूरतें छोटी पड़ जाती हैं। सांसारिक सुख इच्छाएं बढ़ाने का मतलब ही दुख बढ़ाना है।
लाल बहादुर शास्त्री ने भी खुद को मिलने वाला फंड घटवाया था
स्वतंत्रतासंग्राम के दिनों में जब लालबहादुर शास्त्री जेल में थे तो स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को लाला लाजपतराय द्वारा स्थापित सर्वेंट्स ऑफ पीपुल सोसाइटी की तरफ से उनके परिवार को 50 रुपये प्रति माह आर्थिक मदद मिलती थी। एक बार उन्होंने जेल से पत्नी ललिता शास्त्री को पत्र लिखकर पूछा-alt147क्या ये राशि समय पर मिल जाती है और घर खर्च के लिये पर्याप्त हैं?, तो जवाब आया कि वह तो मात्र 40 रुपये में ही घर-खर्च चला लेती हैं और 10 रुपये की बचत भी कर रहीं हैं। इस पर शास्त्री जी ने तुरंत सोसाइटी को पत्र लिखा कि उनके परिवार का खर्च 40 रुपये में चल जाता है, इसलिए घर-खर्च की राशि घटा कर 40 रुपये कर दी जाए और बचे हुए 10 रुपये किसी अन्य जरूरतमंद को दे दिए जाएं
{नहरी महकमे से रिटायर्ड एसडीओ राजिंदर पाल ने सीएम को लिखा लैटर,
{राजिंदर ने कहा, पैसे की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती, इसलिए इच्छाएं ही घटा दीं

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