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योगी के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने से राम मंदिर के निर्माण का रास्ता होगा क्लीयर ?

March 18, 2017 09:28 PM

रमेश शर्मा:भाजपा हाईकमान द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद के लिए योगी आदित्यनाथ के नाम की घोषणा के बाद समूचे हिन्दू समाज में ख़ुशी की लहर सी दौड़ गई लगती है। लगभग दो दशक से भी अधिक समय से अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का इन्तजार कर रहे करोड़ों लोगों को लगने लगा है कि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री के सिंहासन पर विराजमान होने के पश्चात अब राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हो जाएगा। कल 19 मार्च को देश के सबसे बड़े प्रदेश के मुख्यमंत्री के सिंहासन पर विराजमान होने वाले योगी आदित्यनाथ का जन्म 5 जून 1974 को उत्तराखंड के गढ़वाल में हुआ था। योगी का असली नाम अजय सिंह नेगी है और उन्होंने गढ़वाल विश्विद्यालय से गणित में बीएससी की है। 22 साल की उम्र में ही उन्होंने सांसारिक जीवन त्याग कर संन्यास ग्रहण कर लिया था। इसी के बाद इन्हें योगी आदित्यनाथ नाम दिया गया।15 फरवरी 1994 को नाथपंथ के विश्व प्रसिद्ध मठ श्री गोरक्षनाथ मंदिर गोरखपुर के गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ महाराज ने योगी आदित्यनाथ को अपना उत्तराधिकारी शिष्य घोषित कर उनका दीक्षाभिषेक कर दिया। 1998 में महन्त अवैद्यनाथ ने राजनीति से संन्यास की घोषणा कर दी और योगी आदित्यनाथ 12वीं लोकसभा के लिए सांसद चुने जाने पर सिर्फ 26 साल के सबसे कम उम्र के सांसद थे। वह लगातार पांच बार 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 में सांसद चुने गए हैं। 2014 में गोखनाथ मंदिर के महंत अवैद्यनाथ के निधन के बाद वे यहां के महंत यानी पीठाधीश्वर चुन लिए गए। हिंदुत्व एजेंडे की राजनीति करने वाले योगी के बारे में गोरखपुर में उनके समर्थक अक्सर नारा लगाते हैं कि गोरखपुर में रहना है तो योगी-योगी कहना होगा।योगी ने ही हिंदू युवा वाहिनी का गठन किया और पूर्वांचल के इलाके में धर्म परिवर्तन के खिलाफ मुहिम छेड़ दी। हिंदुत्व की राह पर चलते हुए उन्होंने कई बार विवादित बयान दिए। 2007 में गोरखपुर में दंगे हुए तो योगी आदित्यनाथ को मुख्य आरोपी भी बनाया गया। योगी की गिरफ्तारी भी हुई और इस पर काफी हंगामा भी हुआ। योगी आदित्यनाथ के फैसलों पर अक्सर विवाद होता रहा है। बीते दिनों उन्होंने गोरखपुर के कई ऐतिहासिक मुहल्लों के नाम बदलवा दिए। इसके तहत उर्दू बाजार हिंदी बाजार बन गया और अली नगर आर्यनगर हो गया इसके अलावा मियां बाजार भी माया बाजार हो गया है। योगी की धर्म निष्ठा, निडर और दबंग छवि के मद्देनजर सोशल मीडिया और अफसरशाही में अभी से विभिन्न प्रकार की चर्चाओं का बाजार गर्म होने लगा है । राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यूपी की राजनीति और प्रशासन में बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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