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न्यायालयों से

SYLका निर्माण करना ही होगा,पंजाब सरकार को सुप्रीम कोर्ट का तगड़ा झटका

February 22, 2017 05:24 PM

चंडीगढ़ :सुप्रीम कोर्ट में सतलुज यमुना लिंक मामले में बुधवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि लिंक नहर का निर्माण करना ही होगा। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि लिंक नहर में कितना पानी आएगा, यह बाद में तय किया जाएगा। देश के शीर्ष न्यायालय ने कहा कि पंजाब और हरियाणा समझौता कर नहर बनाएंगे तो बेहतर होगा क्योंकि कोर्ट इस मामले में पहले ही दो आदेश जारी कर चुका है। इसके अलावा हरियाणा और पंजाब को कानून व्यवस्था बनाए रखने के आदेश भी दिए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि सतलुज यमुना लिंक को लेकर यथास्थिति बरकरार रखने के आदेश बरकरार रहेंगे। राज्यों में कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी दोनों राज्यों पर है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल दोनों राज्यों के बीच कानून-व्यवस्था बनाए रखने में केंद्र सरकार को आदेश देने से इनकार किया है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र इस मामले में रिजर्व फ़ोर्स है और जरूरत पडऩे पर आगे इस्तेमाल करेंगे। कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी भी जाहिर की कि देश की सबसे बड़ी अदालत इस मामले में आदेश जारी कर चुकी है लेकिन इस पर अमल नहीं किया जा रहा है। दरअसल पंजाब सरकार की ओर दायर की गई एक याचिका में सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी कि हरियाणा से एक लाख लोग सीमा पारकर पंजाब में घुसकर लिंक नहर की जबरन खुदाई करने जा रहे हैं। ये लोग हथियारों से भी लैस हैं। उधर, सतलुज-यमुना लिंक नहर मामले पर सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने कहा कि वो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक सतलुज-यमुना नहर नहीं बनाएगी। पंजाब सरकार ने कहा कि पंजाब टर्मिनेशन आफ वाटर एग्रीमेंट एक्ट 2004 के कानून के मुताबिक वह किसी दूसरे राज्य को पानी देने के लिए बाध्य नहीं है। पंजाब ने कहा कि राष्ट्रपति के रेफरेंस पर दिया गया सुप्रीम कोर्ट का फैसला महज एक राय है और इस राय के बावजूद 2004 का वो कानून प्रभावी है। पंजाब सरकार ने कहा कि हरियाणा सरकार ने 2004 के उस कानून को विशेष रूप से चुनौती नहीं दी है लिहाजा वो कानून प्रभावी है। पंजाब सरकार ने कहा कि जब तक 2004 कानून कानून प्रभावी है तब तक वह किसानों से जमीन वापिस नहीं ले सकता जो उन्हें लौटा दी गई थी ।

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